मक्का की फसल (Maize Crop) के लिए किसान साथी किन खादों का इस्तेमाल करें। जानिए कृषि विभाग की एडवाइजरी।
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Maize Crop | मक्का की फसल 45 से 60 दिन की हो गई है। अच्छी पैदावार के लिए इस समय किसानों को खास ध्यान देने की जरूरत है। मक्का की पैदावार बढ़ाने के लिए कई किसान साथी अंधाधुंध खाद एवं उर्वरक का उपयोग करते है, जो फसल और खेत की मिट्टी के लिए सही नहीं है। ऐसे में कृषि विभाग समय समय पर किसानों को हिदायत देता है। कृषि विभाग ने हाल ही में मक्का की खेती (Maize Crop) करने वाले किसानों के लिए खाद एवं उर्वरक के उपयोग को लेकर उपयोग सलाह जारी की है।
मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए सलाह
कृषि विभाग ने मक्का की फसल (Maize Crop) उगा रहे किसान भाइयों को सलाह दी है कि मक्का में यूरिया (नाइट्रोजन) और अन्य रासायनिक खादों का जरूरत से ज्यादा उपयोग फसल के लिए हानिकारक हो सकता है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि किसान यदि मक्का फसल में जरूरत से ज्यादा यूरिया या एनपीके खाद डालते हैं, तो इससे फसल को लाभ की बजाय नुकसान हो सकता है।
कई बार Maize Crop उपज घट जाती है और लागत बढ़ जाती है। ज्यादा खाद डालने से पौधों की बढ़वार असंतुलित हो जाती है, जिससे दानों का सही विकास नहीं हो पाता। इसके अलावा खेत में खाद का निक्षालन (लिंचिंग) हो जाता है यानी खाद बहकर मिट्टी में नीचे चला जाता है, जिससे पौधों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
इससे मिट्टी की Maize Crop उर्वरता भी घट जाती है और भूजल प्रदूषित होता है। इतना ही नहीं, ज्यादा खाद देने से कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है, जिससे उत्पादन घट जाता है और किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। यदि किसान डीएपी (46% P₂O₅ और 18% N) का उपयोग यूरिया के साथ कर रहे हैं, तो एक हेक्टेयर के लिए यूरिया की मात्रा घटाकर 200 किग्रा/हेक्टेयर कर दें।
इससे संतुलन बना रहेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे पारंपरिक यूरिया की जगह नैनो यूरिया का उपयोग करें। इसकी मात्र 4-5 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करें। नैनो यूरिया के उपयोग से यूरिया की खपत में 20-30% तक बचत की जा सकती है। : Maize Crop
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