अच्छी पैदावार देने वाली और देरी से बोवने के लिए भी उपयुक्त गेहूं की 5 बेस्ट वैरायटियां..

आलू की खेती करने वाले और प्याज की नर्सरी से खाली हुए खेत में बोवने (Late Sowing Wheat Varieties) के लिए गेहूं की 5 वैरायटी की जानकारी देखें..

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Late Sowing Wheat Varieties | मध्य भारत के कई क्षेत्रों में आलू की फसल की जाती है। किसान सोयाबीन की जल्दी पकने वाली किस्मों के पश्चात आलू की खेती करते हैं। ऐसे में आलू भी जल्दी पक कर तैयार हो जाते हैं दिसंबर के अंत तक आलू के खेत खाली होने लगते हैं।

किसान आलू के पश्चात गेहूं की पछेती किस्मों की बोवनी करते हैं। ऐसे में दिसंबर अंत तक गेहूं की कौन-कौन से किस्में (Late Sowing Wheat Varieties) है जो अच्छा उत्पादन देगी एवं किसानों के लिए फायदेमंद रहेगी, आईए जानते हैं,..

पूसा ओजस्वी HI-1650

यह एक बायोफोर्टिफाइड, उच्च उत्पादन वाली किस्म है, जिसमें जिंक, आयरन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में है। चपाती, ब्रेड एवं बिस्किट के लिए आदर्श, कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देती है। संक्षेप में जानिए गेहूं की इस वैरायटी की जानकारी …

गेहू :- रोटी वाला

बीज दर :- 20-25 किग्रा / बीघा

अवधिः- 115-120 दिन

उत्पादनः- 14-16 क्विंटल /बीघा (70 से 80 क्विंटल/हेक्टेयर)

सिंचाई :- 3 से 5

हाइट:- 90-92 सेमी

प्रमुख कैरेक्टर:- दाना लंबा, चमकदार, अम्बर रंग; जिंक 42.7ppm, आयरन 39.5ppm, प्रोटीन 11.4%; बायोफोर्टिफाइड, चपाती/ बिस्किट गुणवत्ता उच्च। Late Sowing Wheat Varieties

पूसा अहिल्या एच आई 1634

यह जल्दी कटाई वाली, उच्च तापमान सहनशील किस्म है। उत्पादन की दृष्टि से एवं गुणवत्ता के लिए देशभर में सराही जा रही है। संक्षेप में जानिए गेहूं की इस वैरायटी  की जानकारी..

गेहू :- रोटी वाला

बीज दर:- 20 से 25 किग्रा / बीघा (100 किग्रा / हेक्टेयर)

अवधि:- 105 से 110 दिन

उत्पादन: – 12 से 15 क्विंटल / बीघा (70.6 क्विंटल / हेक्टेयर)

सिंचाई :- 3 से 5

हाइट:- 80 से 85 सेमी

प्रमुख कैरेक्टर :- चपाती व बिस्किट के लिए श्रेष्ठ, प्रोटीन 12.1%, जिंक 36.6ppm, आयरन 39.6ppm, तेज तापमान में भी उत्पादन है। Late Sowing Wheat Varieties

एचआईवी 1544

जल्दी पकने और ज्यादा उत्पादन वाली किस्म, स्वाद व पौष्टिकता के लिए प्रसिद्ध । इसमें गोल, चमकदार दाने होते हैं और बाजार मूल्य अच्छा मिलता है। संक्षेप में जानिए गेहूं की इस वैरायटी की जानकारी …

गेहू – रोटी वाला

बीज दर:- 20 से 25 किग्रा/बीघा

अवधि:- 110 से 115 दिन

उत्पादन:-10 से 13 क्विंटल / बीघा (60 क्विंटल / हेक्टेयर)

सिंचाई :- 3 से 4 (2 से 5)

हाइट:- 85-90 सेमी

प्रमुख कैरेक्टर :- गोल, चमकीले दाने; संतुलित पोषकता, जल्दी पकने वाली, शरबती किस्म। Late Sowing Wheat Varieties

जीडब्लयू 513 – GW-513

बहुत ही उन्नत चमचमाते दानों वाली किस्म है, जिसमें बीज दर कम और उत्पादन ज्यादा है। स्वाद और गुणवत्ता में भी बेहतरीन। Late Sowing Wheat Varieties संक्षेप में जानिए गेहूं की इस वैरायटी की जानकारी..

गेहू :- रोटी वाला

बीज दर:- 20 से 25 किग्रा/बीघा (100 किग्रा / हेक्टेयर)

अवधिः- 105 से 117 दिन (क्षेत्रानुसार)

उत्पादन: – 12-15 क्विंटल / बीघा (77.8-85 क्विंटल /हेक्टेयर)

सिंचाई :- 4 से 5

हाइट:- 78 से 90 सेमी

प्रमुख कैरेक्टर :- आकर्षक चमकीले दाने, jink 39ppm, iron 36ppm, protein 11%, टिलरिंग ज्यादा, चपाती – बिस्किट में उत्तम।

देरी से बुवाई के लिये यह किस्में भी रहती है उपयुक्त कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक देरी से बुवाई के लिये PBW 906, एच.डी. 2932, पूसा 111 डी.एल. 788-2 विदिशा, पूसा अहिल्या एचआई 1634. जे.डब्ल्यू. 1202, जे.डब्ल्यू. 1203. एम.पी. 3336 राज 4238 इत्यादि प्रजातियों भी बेहतर रहती है किसान इन किस्मों की बोवनी करके अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इन किस्मों की बोवनी 31 दिसम्बर तक अवश्य कर दें। Late Sowing Wheat Varieties

बुवाई के पश्चात क्या करें

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि बुवाई के बाद खेत में दोनों ओर से आड़ी तथा खड़ी नालियाँ प्रत्येक 15-20 मीटर पर बनायें तथा बुवाई के तुरन्त बाद इन्हीं नालियों द्वारा बारी बारी से क्यारियों में सिंचाई करें। Late Sowing Wheat Varieties

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गेहूं के लिए सामान्यतः नत्रजन, स्फुर व पोटाश – 4:2:1 के अनुपात में दें। असिंचित खेती में 40:20:10 सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20 सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक दें। सिंचित खेती की मालवी किस्मों को नत्रजन, स्फुर व पोटाश 140:70:35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर दें।

देरी से बुवाई में नत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर व पोटाश की पूर्ण मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी में 3-4 इंच ओरना चाहिये। शेष नत्रजन पहली सिंचाई के साथ दें। Late Sowing Wheat Varieties

खेत के उतने ही हिस्से में यूरिया का भुरकाव करें, जितने में उसी दिन सिंचाई दे सकें। जहाँ तक संभव हो यूरिया बराबर से फैलायें। यदि खेत पूर्ण समतल नहीं है तो यूरिया का भुरकाव सिंचाई के बाद, जब खेत में पैर धंसने बंद हो जायें तब करें। सिंचाई समय पर निर्धारित मात्रा में तथा अनुशंसित अंतराल पर ही करें और देरी से बुवाई में 17-18 दिन के अन्तराल पर 4 सिंचाई करें।

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