दिसंबर माह में गेहूं की बोवनी (Late Sowing Wheat varieties) के लिए उपयुक्त कौन-कौन सी किस्में है आईए जानते हैं..
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Late Sowing Wheat varieties | आमतौर पर गेहूं की बोवनी 25 नवंबर तक पूर्ण हो जाती है। इसके पश्चात भी कई क्षेत्रों में गेहूं की बोवनी होती है प्रमुख रूप से आलू और धान की फसल लेने वाले किसानों को लेट बोवनी के लिए उपयुक्त वैरियटयों की जरूरत होती है।
ऐसे में आज हम गेहूं की देरी से बोई Late Sowing Wheat varieties जाने वाली प्रमुख रूप से उन किस्म की चर्चा करेंगे जो 25 दिसंबर के बोई जाने पर भी अच्छा उत्पादन देती है। आईए जानते हैं क्योंकि इन किस्मों के बारे में..
पछेती किस्मों से ले सकेंगे अच्छा उत्पादन
आमतौर पर धान की देरी से कटाई के बाद पराली प्रबंधन या ज्यादा बारिश होने के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो जाती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि किसान महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार गेहूं की बिजाई देरी से भी कर सकते हैं। Late Sowing Wheat varieties
इसके लिए एचआई 1634, एचआई 1650, पीबीडब्ल्यू 752, पीबीडब्ल्यू 771, डीबीडब्ल्यू 173, जेकेडब्ल्यू 261, एचडी 3059 एवं डब्ल्यूएच 1021 जैसी रोग प्रतिरोधी एवं उच्च उत्पादन वाली किस्मों को अपनाकर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
वहीं, यदि गेहूं की बिजाई में ज्यादा देरी होने पर यानी 25 दिसंबर के बाद भी एचडी 3271, एचआई 1621 एवं डब्ल्यूआर 544 जैसी किस्मों की बिजाई कर सकते हैं। किसान साथी देर से बोवनी के पश्चात पहली सिंचाई 20-25 दिन पर और अन्य सिंचाई 20-22 दिन के अंतराल पर करें। Late Sowing Wheat varieties
देर से बुवाई के लिए जरूरी बातें
देर से बोवनी के लिए बीज दर : देरी से बिजाई की स्थिति में बीज की मात्रा 125 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से डालें।
उर्वरक : बिजाई करने के दौरान नाइट्रोजन 120 किग्रा, 60 किग्रा फॉस्फोरस और 40 किग्रा पोटाश की प्रति हैक्टेयर की दर से डालें । Late Sowing Wheat varieties
देर से बुवाई के बाद खरपतवार प्रबंधन : खेत में संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले दोनों खरपतवारों की समस्या है तो सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 डब्ल्यूजी 13.5 ग्राम या सल्फोसल्फ्यूरॉन मेट्सलफ्यूरॉन 80 डब्ल्यूजी 16 ग्राम प्रति एकड़ की दर 120-150 लीटर पानी में घोलकर पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के 10-15 दिन बाद छिड़काव करें।
कनकी गुल्ली डंडा पर नियंत्रण : बुवाई से 0-3 दिन बाद 60 ग्राम / एकड़ की दर से पाइरोक्सासल्फॉन 85 डब्ल्यूजी का या पेंडीमेथालिन 30 ईसी 2.0 लीटर प्रति एकड़ की दर 150-200 लीटर पानी का उपयोग में घोलकर छिड़काव करें। Late Sowing Wheat varieties
देरी से बोई जाने गेहूं में रोग प्रबंधन
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने एक सलाह जारी की है, जिसमें खरपतवार और रोग से बचाव के लिए किसान इन बातों का ध्यान रखें :–
गेहूं में दीमक : देरी से बोई जाने गेहूं के फसल में दीमक देखा जा रहा है। इसके फैलने से उत्पादन पर असर होता है. ऐसे में दीमक से नियंत्रण के लिए क्लोरोपाइरीफॉस @ 0.9 ग्राम ए.आई./किलो बीज (4.5 मिली उत्पाद डोज/किग्रा बीज) से बीज उपचार किया जाना चाहिए था। Late Sowing Wheat varieties
योमेथोक्साम 70 डब्ल्यू एस (क्रूजर 70 डब्ल्यूएस) @ 0.7 ग्राम ए.आई./किलो बीज (4.5 मिली उत्पाद डोज /किग्रा बीज) या फिप्रोनिल (रीजेंट 5 एफएस @ 0.3 ग्राम ए.आई./किग्रा बीज या 4.5 मिली उत्पाद डोज /किलो बीज) से बीज उपचार भी बहुत प्रभावी है।
गुलाबी तना छेदक कीट : गुलाबी तना छेदक कीट का प्रकोप गेहूं फसल के उन खेतों में अधिक देखा जाता है, जहां गेहूं की बुवाई कम जुताई करके की जाती है। इससे बचाव के लिए गुलाबी तना छेदक दिखाई देते ही क्विनालफॉस (ईकालक्स) 800 मिली/एकड़ का पत्तियों पर छिड़काव करें। सिंचाई से भी गुलाबी तना छेदक कीट से होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलती है। Late Sowing Wheat varieties
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