चने की फसल के लिए घातक रोग और उसके नियंत्रण (Gram Crop Disease Control) के उपाय जानिए..
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Gram Crop Disease Control | रबी सीजन में प्रमुख रूप से गेहूं मसूर सरसों और चने की खेती होती है। अधिकांश क्षेत्रों में रबी फसले इस समय 30 से 50 दिनों की अवधि की हो चुकी है। इस समय फसलों के लिए कीट एवं रोग नियंत्रण जरूरी हो जाता है।
कीट एवं रोग फैलने पर पूरी फसल बर्बाद होने का डर बना रहता है ऐसा ही एक रोग चने की फसल में फैला है जो पूरा खेत का खेत सुख देता है। इस रोग के लक्षण एवं निवारण के लिए कृषि विशेषज्ञों ने जो सलाह जारी की है आईए उसे जानते हैं..
उकठा रोग की पहचान कैसे करें
देशभर में रबी सीजन की फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है इसमें चने की फसल प्रमुख है। ऐसे में चने खेती करने वाले किसानों के लिए उकठा रोग सबसे बड़ी चिंता बन सकता है। यह रोग फसल को किसी भी अवस्था में नुकसान पहुंचा सकता है और कई बार पूरा खेत इसकी चपेट में आ जाता है। Gram Crop Disease Control
ICAR के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि उकठा रोग की पहचान शुरुआत में खेत के छोटे हिस्सों में होती है। पहले कुछ पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं, फिर धीरे-धीरे पौधा पूरी तरह सूख जाता है। जब संक्रमित पौधे की जड़ के पास हल्का चीरा लगाया जाता है तो अंदर काली संरचना दिखाई देती है। यही इस रोग का साफ संकेत है। ऐसे पौधे आगे चलकर फली भी नहीं बना पाते। Gram Crop Disease Control
उकठा रोग का कारण
ICAR के कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक उकठा रोग का कारण फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम फफूंद है, जो मिट्टी और बीज दोनों के जरिए फैलती है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। Gram Crop Disease Control
इस रोग से बचाव के लिए सबसे पहला कदम सही समय पर बुआई है। किसानों को सलाह दी जाती है कि चने की बुआई अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह तक जरूर पूरी करनी चाहिए। इसके साथ ही बीजोपचार बेहद जरूरी है।
बुआई से पहले बीज को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 2 ग्राम थीरम या 2 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। यह उपाय रोग के शुरुआती संक्रमण को काफी हद तक रोक देता है। इसके अलावा रोगरोधी किस्मों का चयन भी फायदेमंद रहता है। Gram Crop Disease Control
रोग नियंत्रण के लिए यह करें
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि पैदावार बढ़ाने और रोग नियंत्रण के लिए एक आसान ट्रिक यह है कि बुआई के 35 से 40 दिन बाद पौधों की शीर्ष कलिका की हल्की तुड़ाई कर दें। Gram Crop Disease Control
इससे पौधे में ज्यादा शाखाएं निकलती हैं और फलियों की संख्या बढ़ती है। अगर फसल देर से बोई गई है तो शाखा बनने या फली बनने के समय 2 प्रतिशत यूरिया या डीएपी के घोल का छिड़काव करने से अच्छा उत्पादन मिल सकता है।
किसान साथी इन बातों का भी रखें ध्यान
इसके साथ ही रबी सीजन की दूसरी फसलों पर भी नजर रखना जरूरी है। देर से बोई गई सरसों में विरलीकरण और खरपतवार नियंत्रण समय पर करें। गोभीवर्गीय सब्जियों, मटर और टमाटर में कीटों की निगरानी के लिए खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं। आलू और टमाटर में झुलसा रोग के लक्षण दिखें तो तुरंत अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करें। Gram Crop Disease Control
मौसम को देखते हुए पालक, धनिया और मेथी की बुवाई भी इस समय लाभकारी साबित हो सकती है। इन छोटे लेकिन असरदार उपायों को अपनाकर किसान न सिर्फ चने की फसल को उकठा रोग से बचा सकते हैं, बल्कि कुल पैदावार और मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं। Gram Crop Disease Control
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