चना, मसूर, सरसों आदि फसलों के साथ गेहूं भी वानस्पतिक अवस्था में ; किसान इस समय इन बातों का ध्यान रखें..

रबी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को इस समय किन बातों का ध्यान रखना (Agriculture Advise) होगा आइए जानते हैं..

 

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Agriculture Advise | इस समय चना, मसूर, सरसों आदि फसलों के साथ-साथ गेहूं भी वानस्पतिक अवस्था में हैं, कहीं कहीं फूल व फली की अवस्था में है। इस समय गेहूं की फसल में खाद, पानी एवं फफूंदनाशक के उपयोग के बावजूद भी 40 से 50 दिन की फसल में पीलापन दिख रहा है।

गेहूं की फसल में पीलापन के कई कारण हो सकते हैं जैसे नाइट्रोजन, जिंक, गंधक, आयरन, मैग्नीज आदि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी या दीमक व जड़ माहू कीट का प्रकोप या पानी की अधिकता व नाइट्रोजन की कमी- गेहूं की पुरानी पत्तियां पहले प्रमुख कृषिविज्ञान पीली होती हैं एवं पत्तियां छोटी, तना पतला तथा बढ़वार केन्द्र रायसेन कम होती है।

गेहूं की फसल में नाइट्रोजन की कमी की पूर्ती के लिए पहले पानी पर यूरिया का उपयोग 50 से 60 किग्रा प्रति एकड़ की दर से करें या जल विलेय उर्वरक एन.पी.के. 18:18:18 मात्रा 1 किग्रा प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। गेहूं एवं अन्य रबी फसलों Agriculture Advise को लेकर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई समसामयिक जरूरी सलाह देखें..

गेहूं में इल्ली का प्रकोप होने पर यह करें

गेहूं की फसल में इल्ली का प्रकोप अभी देखा जा रहा है, इसके नियंत्रण के अनुशासित कीटनाशक का उपयोग करें।इल्ली के प्रभाव वाले खेतों में इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव तुरंत करें। गेहूं की फसल में इल्ली नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफॉस साइपरमेथ्रिन 44 ईसी 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। Agriculture Advise

सरसों की फलियों में बीज बनने पर सिंचाई करें

गेहूं और जौ में दूसरी सिंचाई फुटान के समय की जानी चाहिए। या यह सिंचाई बुवाई के 45-50 दिन बाद करें। सरसों की फसल में फलियों में हरे बीज बनने की अवस्था पर सिंचाई करें। चेपा कीट की लगातार निगरानी करते रहें। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर डाइमेथोएट 30 ईसी 1.0 मिली का प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। Agriculture Advise

सरसों को तना गलन से बचाने का तरीका

सरसों की फसल में तना गलन की संभावना है। इसके नियन्त्रण के लिए बुवाई के 65 दिन बाद कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यू.पी. एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर या थायोमिथोक्जाम 25 डब्ल्यू. जी. 100 ग्राम का छिडकाव करें। Agriculture Advise

लहसुन की फसल में 10-12 दिन में सिंचाई जरूरी

लहसुन की फसल में 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। मैथी की फसल में पुष्पन अवस्था पर सिंचाई करें। चने में फली छेदक कीट के नियन्त्रण के लिए प्रथम भुरकाव फूल आने से पूर्व मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें। Agriculture Advise

प्याज में परपल ब्लोस रोग की निगरानी करते रहें

प्याज में परपल ब्लोस रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण पाए जाने पर डाएथेन एम-45 @ 3 ग्राम/लीटर पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि (1 ग्राम प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें। Agriculture Advise

काली मस्सी से फसलों को बचाएं

काली मस्सी (डाउनी मिल्ड्यू) लहसुन, अफीम, प्याज की फसल पर देखने को मिल रहा है। इसकी रोकथाम के लिए काबेंडाजिम 12% + मैंकोजेब 63% डब्ल्यूपी का छिड़काव करें। Agriculture Advise

इन कारणों से पाले की आशंका

तापमान में अचानक गिरावट, शांत हवा और साफ आसमान पाले के हमले के संकेत हैं। सरसों, धनिया, आलू, टमाटर, चना और बैंगन जैसी फसलों को पाले के हमले से बचाने के लिए तनु सल्फ्यूरिक एसिड 0.1% (1000 लीटर पानी में 1 लीटर H2SO4) या थायोरिया 500 पीपीएम (1000 लीटर पानी में 500 ग्राम थायोरिया) का छिड़काव करें। Agriculture Advise

इन फसलों में फूल आने की अवस्था में या पाले के पूर्वानुमान के दिन हल्की सिंचाई करें। नर्सरी, छोटे बगीचों और कैश क्रॉप वाले खेतों में मिट्टी का तापमान बहुत ज्यादा गिरने से रोकने के लिए पौधों को बोरी, पॉलिथीन या पुआल से ढक दें।

तेज हवा की दिशा यानी उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बोरी के विंडब्रेक लगाएं। नर्सरी, किचन गार्डन और कीमती फसलों वाले खेतों में उत्तर-पश्चिम दिशा में बोरी के विंडब्रेक लगाएं और उन्हें क्यारियों के किनारों पर रखें, और दिन में उन्हें हटा दें। Agriculture Advise

जब पाला पड़ने की संभावना हो तो फसलों को हल्की सिंचाई दें। नम मिट्टी ज्यादा समय तक गर्मी बनाए रखती है और मिट्टी का तापमान तेजी से नहीं गिरता । इससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरने से बचता है। इससे फसलें पाले से होने वाले नुकसान से बच जाती है।

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