गेहूं में पीलापन दूर करने और चने में सूखने की समस्या का किस प्रकार निदान करें कृषि विशेषज्ञों से जानिए..

रबी सीजन की फसलों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रमुख सलाह (Rabi Crop Advise)Rabi Crop Advise) जारी की है आईए देखते हैं डिटेल..

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Rabi Crop Advise | रबी सीजन की प्रमुख फसलें गेहूं एवं चना इस समय लगभग 20 से 25 दिनों की अवधि की हो चुकी है। किसानों के द्वारा गेहूं में यूरिया खाद देकर सिंचाई की जा रही है। इसके साथ ही सिंचित चने की फसल में भी पहली सिंचाई हो रही है। गेहूं की फसल में इन दोनों पीलापन आना आम समस्या रहती है, वही चने की फसल में भी सुखत रोग का प्रभाव देखने को मिलता है।

गेहूं एवं चने की फसल में होने वाले वाली इन दोनों समस्याओं से पैदावार पर विपरीत असर पड़ता है। रबी फसलों की इन समस्याओं से निजात पाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने यह सलाह Rabi Crop Advise जारी की है..

गेहूं की फसल में पीलापन क्यों आता है

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गेहूं की फसल में पीलापन आना एक आम समस्या है और इसके कई कारण हो सकते हैं। प्रमुख रूप से गेहूं की फसल में नाइट्रोजन की कमी के कारण पीलापन की समस्या उत्पन्न होती है। पौधे में नाइट्रोजन की कमी होने पर पुरानी पत्तियाँ पहले पीली पड़ती हैं, और फिर ऊपर की ओर पीलापन बढ़ता है। पत्तियाँ हल्की हरी से पीली हो जाती हैं, और विकास रुक जाता है।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इसके तुरंत उपचार के लिए फसल में यूरिया (Urea) का छिड़काव या ऊपरी ड्रेसिंग: 40-50 किलो यूरिया प्रति एकड़ स्प्रे करें। इसके अलावा 19:19:19 या 12:32:16 (NPK) का घोल बनाकर स्प्रे करें या 2% घोल (2 किलो/100 लीटर पानी) बनाकर स्प्रे करें।(Rabi Crop Advise)

पीलापन होने का एक दूसरा कारण गेहूं की फसल में आयरन की कमी होना भी है। इसके निदान के लिए किसान साथी फेरस सल्फेट (FeSO4) 0.5% + साइट्रिक एसिड/नींबू का रस 0.1% स्प्रे करें।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की फसल में जिंक की कमी (Zinc deficiency) होने पर भी पत्तियों में सफेदी ज्यादा आती है। इसके साथ-साथ यह भी देखने में आता है कि पानी की अधिकता या जलभराव – जड़ें सड़ने लगती हैं, पीलापन आता है। वहीं कुछ इलाकों में ठंड के असर के कारण भी गेहूं की फसल में पीलापन आ जाता है लेकिन इस वर्ष उत्तर भारत में अभी इतनी ठंड नहीं होती कि ये लक्षण आएं।(Rabi Crop Advise)

अच्छी पैदावार के लिए यह भी करें

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगली खाद में DAP की जगह 10:26:26 या 12:32:16 डालें। मिट्टी में जैविक खाद (वर्मी कम्पोस्ट/गोबर की खाद) मिलाएँ और जिंक सल्फेट 21% (25 किलो/एकड़) बुवाई के समय जरूर डालें।

चने की फसल में सूखने की समस्या

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक चने की फसल में सूखने की समस्या को उकठा या विल्ट रोग कहते हैं। यह रोग संक्रमित मिट्टी, संक्रमित बीज की बुआई करने से और फसल में अधिक नमी, अनियमित सिंचाई के कारण फैलता है।

इस रोग के प्रमुख लक्षण

  • फसल सूखने लगती है।
  • पौधे मुरझा जाते हैं।
  • जड़ों में लाल काली धारियां दिखाई देती हैं।(Rabi Crop Advise)

चने की फसल में उकठा या विल्ट रोग का निदान

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार चने की फसल में सूखने का रोग होने पर कार्बेंडाजिम 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। वैकल्पिक उपाय के रूप में 500ग्राम कार्बेंडाजिम दवा को 2 से 3 परात बजरी में मिलाकर प्रति बीघा के हिसाब से भुरकाव करें।(Rabi Crop Advise)

रबी फसलों में दीमक की समस्या का समाधान

भारतीय गेंहू एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह छौक्कर ने बताया कि गेहूं के खेत में अंकुरण अवस्था में दीमक का आक्रमण होता है तो पौधे पूरी तरह सूख जाते हैं। पौधे आसानी से उखाड़े जा सकते हैं। जिन किसान भाई के जमीन में दीमक की समस्या है, वे किसान भाई Chlorpyriphos 10 EC, 2 ltr, 20 kg मिट्टी में मिलाकर छिड़काव कर दें, उसके तुरंत बाद सिंचाई कर दें। (Rabi Crop Advise)

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