मौसम विभाग ने किसानों के लिए Rabi Crop Production के संबंध में परामर्श एवं सलाह जारी की है, आईए जानते हैं डिटेल..
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Rabi Crop Production | जनवरी के पहले हफ्ते में मौसम विभाग के पूर्वानुमान से गेहूं की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि दूसरी ओर मौसम विभाग के अनुमान के बावजूद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद रवि फसलों को लेकर आशान्वित नजर आ रहा है।
इस और आईसीएआर के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बावजूद रबी फसलों का अच्छा उत्पादन होगा। मौसम विभाग ने क्या पूर्वानुमान जारी किया है एवं उत्पादन पर इसका असर कैसे और कितना पड़ेगा जानिए..
मौसम विभाग ने यह पूर्वानुमान किया जारी
मौसम विभाग ने इस वर्ष गर्मी की जल्दी शुरुआत होने का पूर्वानुमान जारी किया है विभाग के मुताबिक फरवरी में ही गर्मी का असर शुरू हो जाएगा। विभाग ने संकेत दिए हैं कि जनवरी 2026 के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। Rabi Crop Production
मौसम विभाग का यही अनुमान किसानों की चिंता का कारण बना है, क्योंकि फरवरी का महीना गेहूं की बालियों में दाना भरने का सबसे अहम दौर होता है। इस चरण में तापमान बढ़ने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है, जैसा कि फरवरी 2022 में देखने को मिला था। हालांकि, ICAR के सीनियर वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में गेहूं की किस्मों में बड़ा बदलाव आया है।
आईसीएआर अच्छी पैदावार को लेकर आशान्वित
मौसम विभाग के अनुमान के बाद जहां किसान सतर्क हो गए हैं, वहीं वैज्ञानिक बदलते बीज पैटर्न और नई किस्मों को बड़ी राहत के तौर पर देख रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का मानना है कि फरवरी में संभावित गर्मी का असर इस बार गेहूं की फसल पर सीमित रह सकता है। Rabi Crop Production
आईसीएआर के वैज्ञानिकों का मानना है कि मध्य भारत और उत्तर-पश्चिमी मैदानों में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में ऐसी किस्में बोई जा रही हैं, जो अंतिम अवस्था की गर्मी को सहन करने में सक्षम हैं। इनमें H I 1650, HD 3385, DBW 187, HD 3226 और HD 3086 जैसी किस्में प्रमुख हैं,
जो तापमान बढ़ने की स्थिति में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि तापमान बढ़ने का समय और उसकी तीव्रता दोनों ही बेहद अहम हैं। अगर फरवरी 15 से पहले तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है तो जोखिम ज्यादा होता है। Rabi Crop Production
यह रणनीति गेहूं उत्पादन को स्थिर रखने में करेगी मदद
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि दिन का तापमान अगर 26 से 27 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहता है तो आमतौर पर फसल को नुकसान नहीं होता। लेकिन, अगर यह तापमान लंबे समय तक 28 से 29 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर बना रहता है तो उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। Rabi Crop Production
ICAR ने पिछले कुछ वर्षों में अगेती बुआई के लिए भी खास किस्में बनाई हैं, जिन्हें अक्टूबर में बोया जाता है। इन किस्मों में फरवरी तक दाना भरने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाती है, जिससे बाद की गर्मी का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यही रणनीति आने वाले समय में गेहूं उत्पादन को स्थिर रखने में मदद करेगी।
फरवरी 2025 ऐतिहासिक रूप से गर्म रहा
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2025 देश के लिए ऐतिहासिक रूप से गर्म महीना रहा था। उस दौरान औसत न्यूनतम तापमान 1901 के बाद सबसे अधिक दर्ज किया गया था, जबकि अधिकतम तापमान भी दूसरे स्थान पर रहा। Rabi Crop Production
इसके बावजूद देश ने 2024-25 में रिकॉर्ड 117.94 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हासिल किया, जो वैज्ञानिकों के भरोसे को मजबूत करता है। वहीं, इस बार बुवाई के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
दिसंबर के अंत तक गेहूं की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा अधिक रहा है और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस सीजन में भी रिकॉर्ड क्षेत्र में फसल बोई जाएगी। सरकार ने 2025-26 के लिए 119 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिसे अप्रैल से कटाई के दौरान हासिल करने की उम्मीद की जा रही है। Rabi Crop Production
किसानों का गेहूं और चना की ओर झुकाव
रबी फसलों के बढ़ते रकबे के पीछे इस बार मौसम की शुरुआती अनुकूलता, पर्याप्त नमी और किसानों का गेहूं व चना की ओर झुकाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। Rabi Crop Production
बाजार जानकारों का कहना है कि चना के पिछले सीजन में मिले बेहतर भाव और सरकारी खरीद की उम्मीद ने किसानों को इस फसल की ओर आकर्षित किया है। वहीं अन्य दलहनों में कीमतों की अनिश्चितता और बीज उपलब्धता ने असर डाला है।
जनवरी तक यदि मौसम अनुकूल रहा तो गेहूं और तिलहन के क्षेत्रफल में और सुधार संभव है, लेकिन दलहनों में संतुलन बनना चुनौती बना रहेगा। Rabi Crop Production
देश में रबी की बिजाई बढ़ी
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में दिसंबर तक देश में रबी फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र बढ़कर 580.70 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 572.60 लाख हेक्टेयर से 8.10 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह रकबा अब भी रबी फसलों के सामान्य औसत क्षेत्रफल 637.81 लाख हेक्टेयर से कम है।
वर्ष 2024-25 में रबी फसलों का कुल क्षेत्रफल 659.39 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था। कई राज्यों में अभी भी रबी फसलों की बिजाई जारी है और जनवरी तक इसके बने रहने की संभावना है। Rabi Crop Production
आंकड़ों के मुताबिक गेहूं का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 300.39 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 301.63 लाख हेक्टेयर हो गया है। सामान्य औसत 312.35 लाख हेक्टेयर के मुकाबले यह अभी पीछे है। धान का उत्पादन क्षेत्र 11.52 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 13.35 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
दलहनों का कुल रकबा 123.02 लाख हेक्टेयर से उछलकर 126.74 लाख लेकिन इसमें हेक्टेयर पहुंच गया है, अधिकांश बढ़त केवल चना फसल से आई है।Rabi Crop Production
दलहन समूह में चना का क्षेत्रफल 86.81 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 91.70 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि मसूर, मटर, कुलथी, उड़द, मूंग और खेसारी जैसी अन्य दलहन फसलें पिछले वर्ष से पीछे चल रही हैं।
दलहनों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 140.42 लाख हेक्टेयर तय है। तिलहनों में सरसों, सनफ्लावर और सूरजमुखी का रकबा बढ़ा है, जबकि मूंगफली और अलसी में गिरावट रही । मोटे अनाजों में ज्वार पिछड़ा है, जबकि मक्का और जौ आगे चल रहे हैं। Rabi Crop Production
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