सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने सोयाबीन को लेकर रिपोर्ट (Soybean Report) जारी की है, आईए देखते हैं पूरी जानकारी..
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Soybean Report | सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन (सोपा) के द्वारा समय-समय पर सोयाबीन के भाव, पैदावार एवं अन्य जानकारियों से संबंधित रिपोर्ट जारी की जाती है। इसी क्रम में सोपा ने हाल ही में सोयाबीन के रकबे से संबंधित रिपोर्ट जारी की है। सोपा द्वारा अनुमान लगाया गया है कि सोयाबीन के रकबे में इस वर्ष तकरीबन 5% से अधिक की कमी होने की संभावना है।
सोयाबीन के रकबे में कमी के चलते सोयाबीन के भाव एवं पैदावार पर असर पढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इधर दूसरी ओर अगस्त माह के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ लगातार बारिश का क्रम अब तक सितंबर माह के पहले सप्ताह तक बना हुआ है। इसका असर भी सोयाबीन एवं अन्य खरीफ फसलों पर पढ़ने की संभावना है। सोपा द्वारा जारी पूरी रिपोर्ट एवं भाव पर क्या असर पढ़ने की संभावना है आईए जानते हैं..
सोयाबीन के रकबे में लगातार गिरावट
सोपा द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में खाद्य तेलों की 60 फीसदी से ज्यादा जरूरत अब भी आयात से पूरी हो रही है। लगातार सस्ते आयातित तेलों की आमद से घरेलू बाजार में तिलहन फसलों की कीमतें दब गई हैं। नतीजा यह हुआ है कि किसान अब सोयाबीन जैसी फसलों की बुआई से पीछे हटने लगे हैं। इस साल सोयाबीन के रकबे में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। Soybean Report
सोयाबीन तेल और खली की कीमतें अब भी कमजोर
सोपा (सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे सीजन में मंडियों में दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे ही रहे। ऐसे में सरकार को करीब 20 लाख टन सोयाबीन की एमएसपी पर खरीद करनी पड़ी, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ा। Soybean Report
इसके अलावा भंडारण और नीलामी की प्रक्रिया में भी करीब 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। नए सीजन के लिए MSP 5,328 प्रति क्विंटल तय की गई है, लेकिन सोयाबीन तेल और खली की कीमतों में अब भी कमजोरी बनी हुई है। आयात शुल्क में कटौती और सस्ते डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स की बाजार में उपलब्धता ने घरेलू मांग को और दबा दिया है।
सोयाबीन के भाव पर क्या पड़ेगा असर
भले ही सोयाबीन के रकबे में कमी हो गई है लेकिन इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में स्थानीय बाजार में सोयाबीन के भाव तेज हैं। यही कारण है की आयत अधिक हो रहा है। Soybean Report
जानकारों का कहना है कि अगर यही हालात रहे तो सरकार को फिर से MSP पर बड़ी मात्रा में खरीद करनी पड़ सकती है। अनुमान है कि इससे 5 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च हो सकता है।
सोपा (सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक का कहना है कि मौजूदा समय में खाद्य तेलों की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी हुई हैं और इनका महंगाई में खास योगदान नहीं है,Soybean Report
लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलना भी जरूरी है। जानकार बताते हैं कि सोयाबीन के भाव सीजन के दौरान 3500 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल के मध्य रह सकते हैं।
इधर फसलें कटाई की स्थिति में, खेतों में भरा पानी
पिछले दिनों से लगातार हो रही बरसात ने किसानों की चिंताएं गहरा दी हैं। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें कटाई के लिए तैयार खड़ी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश से खेतों में जलभराव और फसलों में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। Soybean Report
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान समय में खरीफ की फसल खासकर सोयाबीन पकने की अंतिम अवस्था में है और कहीं-कहीं पर यह कटाई की स्थिति में है।
किसानों का कहना है कि इस साल मानसून कमजोर रहा, जिससे फसलों को शुरुआती समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। अब जब फसलें पक कर कटाई के लिए तैयार हो गईं, तभी लगातार हो रही बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेरने का खतरा खड़ा कर दिया है। कई जगहों पर खेतों में पानी भरने से फसल गिरने लगी है। Soybean Report
किसानों का कहना है कि अगर बारिश का दौर लंबा खिंचता है तो फसलें खेतों में खराब हो जाएंगी, जिससे बड़ा नुकसान होगा। वहीं, कुछ किसानों का मानना है कि यदि धूप जल्द निकल आए तो नमी से फसलों को लाभ भी मिल सकता है।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक ओर उन्हें कम बारिश से फसलों की पैदावार में नुकसान हुआ, और अब ज्यादा बारिश से तैयार फसल पर संकट मंडरा रहा है। Soybean Report, Soybean Report
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