Mustard Varieties : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान IARI के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए ताजा सलाह जारी की। देखें डिटेल..
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Mustard Varieties | मौसम शरद की गोद में आते ही खेतों में सरसों की हरी चादर बिछाने का समय आ गया है। तिलहनी फसलों की रानी सरसों न सिर्फ तेल के रूप में रसोई की शान है, बल्कि इसकी खली मवेशियों का पौष्टिक आहार भी बनती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान IARI के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए ताजा सलाह जारी की है सितंबर से ही अगेती Mustard Varieties बुवाई शुरू करें, लेकिन सही किस्में चुनें तो पैदावार 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है। हृदय रोगों से बचाने वाले कम एरोसिक एसिड वाले बीजों की ये नई प्रजातियां बाजार में मौजूद हैं।
सरसों की अगेती बुवाई: 10-30 अक्टूबर का गोल्डन विंडो
Mustard Varieties | रबी सीजन में सरसों सिंचित और असिंचित दोनों इलाकों में उगाई जाती है। पूरे भारत में इसकी खेती होती है, लेकिन गुणवत्ता ही इसे अलग बनाती है। तेल में एरोसिक एसिड की ज्यादा मात्रा हृदय रोगों का खतरा बढ़ाती है, जबकि खली में ग्लूकोसिनोलेट्स की वजह से पोल्ट्री में घेंघा रोग हो सकता है। IARI ने इसी समस्या का समाधान निकाला है कम एरोसिक (2% से कम) वाली नौ प्रजातियां विकसित की हैं।
अगेती बुवाई से फसल मजबूत होती है और बाजार में ऊंची कीमत मिलती है। 10 से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई करें, ताकि फसल शरद की ठंड में फले-फूले। बीज भरोसेमंद स्रोत से लें, वरना नुकसान हो सकता है। : Mustard Varieties
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कम एरोसिक वाली उन्नत किस्में: स्वस्थ तेल का राज
IARI की पहली कम एरोसिक प्रजाति है पूसा करिश्मा इसमें एरोसिक एसिड 2% से कम, जो खाने के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। इसके बाद आईं पूसा सरसों 21, 22, 24 और 29 ये लंबे कद की हैं, पकने में ज्यादा समय लेती हैं, लेकिन पैदावार अच्छी है। : Mustard Varieties
नई किस्म पूसा सरसों 30: मोटे दाने, समय पर पकने वाली, पैदावार 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। पिछले साल लॉन्च हुई पूसा सरसों 32 140-145 दिनों में तैयार हो जताई और 32-35 क्विंटल उपज देती है।
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डबल जीरो प्रजातियां: खली और तेल दोनों सेफ, पोल्ट्री बिजनेस को बूस्ट
Mustard Varieties | अगर आप डबल बिजनेस सोच रहे हैं तेल बेचो और खली पोल्ट्री को तो पूसा की डबल जीरो किस्में परफेक्ट हैं। इनमें एरोसिक एसिड 2% से कम और ग्लूकोसिनोलेट्स 30 पीपीएम से कम। देश की पहली ऐसी प्रजाति पूसा डबल जीरो सरसों 31: 140-145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 28-32 क्विंटल देती है।
इस साल आई नई पूसा डबल जीरो: सिर्फ 140 दिनों में तैयार, पैदावार 32-34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। ये किस्में घेंघा रोग से मुक्त खली देंगी, जिससे पोल्ट्री फार्मिंग में नया बाजार खुलेगा।
Mustard Varieties | अगर बजट सीमित है, तो पूसा की ये सामान्य किस्में आजमाएं: पूसा बोल्ड, पूसा जगन्नाथ, पूसा जय किसान। नवीनतम पूसा विजय सबसे आगे 145 दिनों में पकती है, मोटे दाने वाली, 32-36 क्विंटल पैदावार देती है।
उन्नत बीजों से न सिर्फ पैदावार बढ़ेगी, बल्कि निर्यात के योग्य तेल भी बनेगा। किसान भाई, मौसम का फायदा उठाएं और स्थानीय कृषि केंद्र से बीज लें। सितंबर के अंत तक तैयारी पूरी कर लें, क्योंकि नवंबर में ठंड बढ़ते ही बुवाई का समय निकल जाएगा।।
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