किसानों के लिए लाई जा रही इस नई योजना (Kisan Nyay Yojana) का लाभ किसानों को किस प्रकार से मिलेगा आइए जानते हैं..
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Kisan Nyay Yojana | केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में अलग-अलग योजनाएं चल रही है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को कई प्रकार के लाभ दिए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार अब किसानों को न्याय दिलवाने के लिए किसान न्याय योजना लाने की तैयारी में है। यह (Kisan Nyay Yojana योजना सहकारिता विभाग के माध्यम से किसानों को फायदा पहुंचाएगी। मध्य प्रदेश सरकार की क्या है तैयारी और किसानों को इसका फायदा किस प्रकार से मिलेगा आइए जानते हैं..
यह योजना का प्रारूप
मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रदेश के सभी मंत्रीगण अपने विभागों की उपलब्धियां गिना रहे हैं। इस क्रम में खेल और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सहकारी बैंकों की खराब आर्थिक स्थिति के लिए कमलनाथ सरकार जिम्मेदार है। Kisan Nyay Yojana
उन्होंने कहा कि 15 महीने की कांग्रेस की सरकार में फर्जी किसान कर्जमाफी के कारण को-ऑपरेटिव बैंकों की हालत खराब हुई है। हमारी सरकार बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 300 करोड़ रुपए सहकारी बैंकों को दिए हैं। इस दौरान सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने किसानों के लिए किसान न्याय योजना लाने की बात कही।
किसान न्याय योजना से किसानों को मिलेगा न्याय
सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता के भीतर सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल और बैंकिंग सिस्टम को लेकर है। अप्रैल से प्रदेश की सभी 4500 PACS 100% कंप्यूटरीकृत होकर कमर्शियल बैंकों जैसी सेवाएं देने लगेंगी। इससे किसानों को लेन-देन, ऋण और भुगतान में पारदर्शिता और गति मिलेगी। Kisan Nyay Yojana
मंत्री सारंग ने साफ कहा कि सहकारी संस्थाओं में हुए घपलों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही ‘किसान न्याय योजना’ लाई जाएगी, ताकि यदि किसी कर्मचारी की गलती या घपला हो, तो उसका नुकसान किसान को न झेलना पड़े। यह बयान सहकारिता में जीरो टॉलरेंस और अकाउंटेबिलिटी की दिशा में अहम माना जा रहा है।
किसान न्याय योजना का फायदा किसानों को कैसे मिलेगा
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाई जा रही नई योजना का फायदा उन किसानों को मिलेगा जिन्हें सहकारी समितियों के प्रबंधकों एवं सहकारी बैंकों के घपले-घोटालों की वजह से आर्थिक नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि किसान ऐसे किसानों को आर्थिक मदद देगी। Kisan Nyay Yojana
हालांकि इस योजना का पूरा प्रारूप अभी तैयार नहीं हुआ है, इसमें ओर अन्य प्रकार से भी किसानों को लाभान्वित किए जाने का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इस योजना का पूरा प्रारूप आगामी बजट सत्र तक तैयार होने की संभावना जताई जा रही है। बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। Kisan Nyay Yojana
सहकारी समितियों की कार्य प्रणाली पारदर्शी
सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में खाद के वितरण में सहकारी क्षेत्र ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, यही वजह है कि खाद से जुड़ी नकारात्मक खबरों में सहकारिता का नाम तक नहीं आता। Kisan Nyay Yojana
मंत्री सारंग के अनुसार वर्तमान में मध्यप्रदेश में करीब 70 प्रतिशत खाद वितरण सहकारी सेक्टर के माध्यम से किया जा रहा है। प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS), जिला सहकारी बैंक और मार्कफेड नेटवर्क के जरिए किसानों तक समय पर खाद पहुंचाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था कमजोर होती, तो सबसे पहले सहकारिता पर सवाल उठते, लेकिन शिकायतें निजी नेटवर्क से जुड़ी सामने आती हैं, सहकारिता से नहीं। खाद वितरण को सुचारु बनाने में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) की भूमिका अहम रही है। Kisan Nyay Yojana
मार्कफेड ने एडवांस स्टोरेज और प्री-प्लानिंग की व्यवस्था अपनाई है। इससे सीजन में अचानक दबाव नहीं बना। सप्लाई चेन को सरल और तेज किया गया, यही कारण है कि बोवनी और रबी-खरीफ सीजन में किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा।
प्रदेश में सहकारी ढांचा मजबूत हुआ
मंत्री सारंग ने 2003 और वर्तमान के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि 2003 में खाद की आपूर्ति सीमित थी और खपत भी कम थी। आज खेती का रकबा, उत्पादकता और फसल विविधता बढ़ी है। Kisan Nyay Yojana
इसके अनुरूप खाद की सप्लाई और खपत—दोनों में बड़ा इजाफा हुआ है। इसके बावजूद, प्रदेश में सिस्टम फेलियर जैसी स्थिति नहीं बनी, जो सहकारी ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।
मंत्री सारंग ने मीडिया कवरेज को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद वितरण को लेकर जब भी अव्यवस्था या कालाबाजारी की खबरें आती हैं, उनमें एक भी मामला सहकारिता से जुड़ा नहीं होता। Kisan Nyay Yojana
यह सहकारी समितियों की पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सहकारिता का उद्देश्य मुनाफा नहीं, बल्कि किसान को समय पर और सही दर पर इनपुट उपलब्ध कराना है।
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