फसल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर एवं जिंक (जस्ता) आदि पोषक तत्वों की कमी को ऐसे करें दूर..

रबी फसलों में पोषक तत्वों का प्रबंधन (Replenish Nutrients) बहुत जरूरी है, जानिए पोषक तत्वों के प्रबंधन के उपाय..

 

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Replenish Nutrients | देश में लगभग 95% रबी फसलों की बुवाई का कार्य हो चुका है। इन दिनों खेतों में रबी फसलें लहलहा रही है। किसान रबी फसलों में सिंचाई के साथ-साथ पोषक तत्वों के प्रबंधन में जुटे हुए हैं। गेहूं सहित अन्य रबी फसलों के लिए पांच प्रमुख पोषक तत्वों की विशेष जरूरत रहती है। यह पोषक तत्व कैसे काम करते हैं एवं उनका प्रबंधन एवं उपयोगिता क्या है, आईए जानते हैं…

नाइट्रोजन

नाइट्रोजन अमीनो एसिड प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक होता है। नाइट्रोजन की कमी से पौधों की बढ़वार बहुत कम होती है व पौधे पतले रह जाते हैं व फसल का फुटाव कम होता है। पुरानी पत्तियां कम आयु में पीली पड़ जाती हैं। इसके उपचार के लिए 3 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव 10-15 दिनों के अंतर पर करें। Replenish Nutrients

फास्फोरस

फास्फोरस की कमी से पौधों में जडें कम बनती हैं तथा पौधों की बढवार कम हो जाती है और पौधों का रंग नीला हरा दिखाई देता है तथा बाद में पुरानी पतियां लाल भूरे रंग की दिखाई पड़ती हैं। पत्तियां पतली हो जाती हैं। उपचार के लिए किसान 45 किलो ग्राम डीएपी /एकड पौधो की लाइन के साथ डालकर सिचाई करें। Replenish Nutrients

पोटाश

पोटाश पौधे में भोजन बनाने तथा भोजन को विभिन्न भागों तक पहुंचाने में सहायक होता है। पोटाश की कमी के लक्षण आमतौर पर पहले पुराने पत्तों पर दिखाई देते हैं जबकि छोटी पत्तियों में आमतौर पर हरे रंग के बने रहते हैं। Replenish Nutrients

लक्षण एक पीले क्लोरोसिस के रूप में शुरू होता है पुरानी पत्तियों की नोक पीली पड़ जाती है। इसके उपचार के लिए 30-35 किलो मयुरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ खेत में डालकर मिट्टी में मिला दें।

सल्फर

सल्फर की कमी नई पत्तियों में दिखाई देती है। पत्तियों में पीलापन आ जाता है। सारी की सारी पत्ती पीली पड जाती है लेकिन पत्तियां सुखती नहीं। उपचार इसके सल्फर की कमी को मिट्टी परिक्षण के आधार पर जिप्सम डालकर पूरा किया जाता है। Replenish Nutrients

जिंक (जस्ता)

हल्की भूमि में जहां जैविक कार्बन कम होता है वहां अक्सर जिंक की कमी पाई जाती है। उपचार के लिए तब 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट और 2.5 प्रतिशत यूरिया को घोल फसल पर 2-3 छिड़काव 10-12 दिन के अंतराल पर करने से कमी के लक्षण दूर हो जाते हैं। Replenish Nutrients

आईसीएआर के विशेषज्ञों ने यह दिए सुझाव

आईसीएआर के विशेषज्ञों ने किसानों को उपज बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जैविक खाद जैसे गोबर की खाद और केंचुए की खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है। इसके अलावा, तरल जैविक फॉर्मूलेशन को गोबर में मिलाकर खेत में छिड़कने से उपज में सुधार होता है। Replenish Nutrients

कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि अगर जिप्सम उपलब्ध नहीं है, तो जैविक फॉर्मूलेशन का उपयोग करके किसान अपनी उपज को बेहतर बना सकते हैं।

विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे इन नई तकनीकों और किस्मों का उपयोग करें। उन्होंने कहा, ऊसर और कल्लर जमीनों पर खेती के लिए ये किस्में और जैविक फॉर्मूलेशन बहुत उपयोगी हैं। इनका सही उपयोग करके किसान अपनी उपज को बढ़ा सकते हैं और अपनी जमीन की क्वालिटी में सुधार कर सकते हैं। Replenish Nutrients

पछेती बुवाई पर ऐसे करें खरपतवार प्रबंधन

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गेहूं की फसल में खरपतवार प्रबंधन बहुत जरूरी है खरपतवार के कारण उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। Replenish Nutrients

इसलिए खेत में संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले दोनों खरपतवारों की समस्या है तो सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 डब्ल्यूजी 13.5 ग्राम या सल्फोसल्फ्यूरॉन मेट्सलफ्यूरॉन 80 डब्ल्यूजी 16 ग्राम प्रति एकड़ की दर 120-150 लीटर पानी में घोलकर पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के 10-15 दिन बाद छिड़काव करें।

वहीं कनकी गुल्ली डंडा पर नियंत्रण के लिए बुवाई से 0-3 दिन बाद 60 ग्राम / एकड़ की दर से पाइरोक्सासल्फॉन 85 डब्ल्यूजी का या पेंडीमेथालिन 30 ईसी 2.0 लीटर प्रति एकड़ की दर 150-200 लीटर पानी का उपयोग में घोलकर छिड़काव करें। Replenish Nutrients

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