प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) को लेकर नया अपडेट क्या है आईए जानते हैं..
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Crop Insurance Scheme | प्राकृतिक आपदा से फसलों की सुरक्षा कर के रूप में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है इस योजना के तहत किसानों को फसल नुकसानी पर बीमा क्लेम दिया जाता है। योजना के तहत अरबी फसलों का बीमा करवाने की तारीख इस वर्ष 31 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है।
फसलों का बीमा दो तरह से होता है, जिन्होंने बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड लिया है और जो ओवरड्यू नहीं है उनका फसल बीमा स्वत हो जाता है। इसके अलावा कृषि ऋण और केसीसी नहीं लेने वाले किसानों को बैंकों में जाकर फसल बीमा करवाना पड़ता है।
फसल बीमा Crop Insurance Scheme पोर्टल पर भी फसल बीमा करवाया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण घोषणा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है आईए जानते हैं पूरी जानकारी..
यह घोषणा अभी तक पूरी नहीं हुई
गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा कर बताया था कि अब जंगली जानवरों से फसल खराबे पर किसानों को बीमा क्लेम दिलाया जाएगा। खरीफ सीजन के दौरान की गई घोषणा का रबी सीजन तक लागू नहीं किया जा सका है। Crop Insurance Scheme
अभी तक अफसरों के पास केंद्र सरकार से कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं, जबकि रबी सीजन की बुवाई हो चुकी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों को बीमा कराने की आखिरी तिथि में भी सिर्फ दो दिन शेष रहे हैं। ऐसे में लाखों किसानों ने फसलों का बीमा करवा लिया है।
अगले दो दिन में भी शेष रहे किसान अपनी फसलों का बीमा ले लेंगे। मगर उन्हें यह पता नहीं कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को खराब करने पर किस तरह क्लेम मिलेगा। इसकी अब तक न तो अफसरों के पास कोई गाइडलाइन आई है और न ही बीमा कम्पनियों के पास। फसल बीमा के पोर्टल पर भी किसी तरह का सेक्शन एड भी नहीं किया गया है। Crop Insurance Scheme
ऐसे तो बीमा क्लेम में दिक्कत आएगी
बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि योजना को लागू करने से पहले इसका प्रीमियम तय करना आसान नहीं होगा। अब तक फसल बीमा ले चुके किसानों की फसलों से अगर किसी तरह का एक्स्ट्रा प्रीमियम लिया ही नहीं गया है तो क्लेम देना भी मुश्किल हो जाएगा। सरकार कोई इसका फॉर्मूला निकाले तो अलग बात है। Crop Insurance Scheme
रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, मक्का, सरसों, तारामीरा, जीरा, रायड़ा सहित अन्य कई फसलों की बड़े स्तर पर बुआई की गई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार लक्ष्यों की 60 से 118 प्रतिशत तक बुवाई हो चुकी है।
मध्य प्रदेश एवं राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों में सुअर, नील गाय, आवारा पशुधन भी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसे बीमा कवरेज में शामिल करने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। Crop Insurance Scheme
घोषणा पर अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका
गौरतलब है कि पिछले साल खरीफ और रबी सीजन की बुवाई से पहले केंद्र सरकार ने कृषि वैज्ञानिकों को खेतों और गांवों में किसानों के पास उनकी समस्याओं को सुनने भेजा था। इसका दो से तीन सप्ताह का अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान किसानों ने जंगली जानवरों की समस्या और फसल खराबे की पीड़ा बताई थी। Crop Insurance Scheme
कृषि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने फसल बीमा में इसे शामिल करने की घोषणा की थी। तब किसानों को लगा कि रबी सीजन में इसका फायदा मिलेगा। मगर इससीजन के बीमा पीरियड का टाइम भी निकलने को है लेकिन योजना को लेकर अफसरों के पास बताने के लिए कुछ नहीं है। उल्टा अधिकारी कुछ भी बोल नहीं रहे हैं। Crop Insurance Scheme
फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना रबी 2025-26 के अंतर्गत योजना (Crop Insurance Scheme) के क्रियान्वयन के लिये शासन द्वारा फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है। अतः किसान भाइयों से अनुरोध है कि, जिस बैंक से आपका किसान क्रेडिट कार्ड बना है, वहां जाकर फसल बुवाई प्रमाण-पत्र एवं पटवारी हल्के की जानकारी संबंधित बैंक में जाकर अद्यतन करावें।
अऋणी व डिफाल्टर कृषक भाईयों से आग्रह है, कि अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए शीघ्र ही अपने पास की बैंक शाखा जैसे-सहकारी बैंक/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा राष्ट्रीयकृत बैंक में फार्म जमा करायें, ताकि उनकी फसलों का बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) के तहत हो सके। फसल बीमा करने हेतु निम्नानुसार दस्तावेज लेकर जाएं :-
1. बीमा प्रस्ताव पत्र।
2. भू-अधिकार पुस्तिका की फोटोकॉपी।
3. बोनी का प्रमाण-पत्र संबंधित (पटवारी अथवा पंचायत सचिव) से प्राप्त करें।
4. आधार कार्ड, वोटर आई.डी. कार्ड, पैन कार्ड इत्यादि (आधार कार्ड अनिवार्य) में से कोई एक।
5. बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
कृषक भाईयों से पुनः अनुरोध है, कि अपनी फसलों का फसल बीमा आवश्यक रूप से करावें, ताकि किसी भी प्रकार की फसल नुकसानी होने पर उसकी भरपाई हो सके।
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