गन्ने की खेती (Sugarcane Cultivation) करने वाले किसानों के हितों को देखते हुए दो महत्वपूर्ण निर्णय हुए हैं आईए जानते हैं डिटेल..
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Sugarcane Cultivation | गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी खबर यह है कि गन्ने की नई विकसित किस्म को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पांच अन्य राज्यों में भी उगाने की अनुमति मिल गई है। खास बात यह है कि गाने की यह किस्म लाल सड़न रोग से बचाव में सक्षम है, वही इस किस्म का चीनी रिकवरी रेट भी अच्छा है अधिक है।
इसके साथ-साथ गन्ने की खेती को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने नए प्रावधान निर्धारित किए हैं। आईए जानते हैं सरकार द्वारा तय किए गए नए मापदंडों के बारे में..
कोशा 17231 किस्म को 5 राज्यों में मिली मंजूरी
गन्ने की नई किस्म ‘बिस्मिल’ को अब चार अन्य राज्यों- हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी उगाने की अनुमति मिल गई है। पहले सिर्फ उत्तर प्रदेश में इसकी खेती की इजाजत थी। ‘बिस्मिल’ को उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद ने विकसित किया है। यह किस्म स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखी गई है, जो काकोरी कांड के नायक थे। Sugarcane Cultivation
डॉ. अरविंद कुमार ने इसे तैयार किया। इसे कोशा 17231 कहा जाता है। बिस्मिल किस्म लाल सड़न रोग (रेड रॉट) से बचाव में सक्षम है, जो गन्ने की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाता है। औसत पैदावार 86.35 टन प्रति हेक्टेयर है और चीनी रिकवरी रेट 13.97 फीसदी है। इससे किसानों की आय और चीनी उत्पादन बढ़ेगा।
गन्ना बीज उत्पादन के लिए पंजीकरण जरूरी
इधर दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के हितों और गुणवत्तापूर्ण बीज गन्ना उपलब्ध कराने के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास वीना कुमारी ने बताया कि प्रदेश में प्रामाणिक बीज गन्ना उत्पादन एवं वितरण के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। Sugarcane Cultivation
बीज गन्ना उत्पादन व विक्रय करने के इच्छुक गन्ना किसान अपना आवेदन नजदीक के गन्ना विकास परिषद में प्रस्तुत करेगें, वहीं गन्ना विकास निरीक्षक द्वारा निर्धारित समयावधि में इसका सत्यापन किया जाएगा। Sugarcane Cultivation
उन्होंने बताया कि उप गन्ना आयुक्त से प्राप्त संस्तुति पर गन्ना आयुक्त के स्तर से पंजीकरण की प्रकिया पूर्ण की जाएगी। किसानों को आवेदन पत्र के साथ कुल धारित कृषि योग्य भूमि, गन्ना क्षेत्रफल, अपने प्रक्षेत्र पर उत्पादित की जाने
गन्ना किस्म, उत्पादित सीडलिंग की संख्या, बीज फसल के लिए बीज प्राप्त करने के स्रोत आदि का विवरण देना होगा। साथ में यह स्वघोषणा पत्र भी देना होगा कि कोई शिकायत मिलने पर खुद के विरुद्ध बीज अधिनियम 1966 के अनुसार कार्यवाही के लिए गन्ना विकास विभाग पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा। Sugarcane Cultivation
पंजीकृत उत्पादकों द्वारा प्रदेश में स्वीकृत गन्ना किस्मों का ही बीज गन्ना संवर्धन एवं वितरण किया जाएगा. सीड एक्ट का उल्लंघन करने पर 1 हजार रुपये का अर्थदंड और 6 माह के कारावास की सजा का प्रविधान है।
सभी किसानों का पंजीकरण अनिवार्य हुआ
वीना कुमारी ने बताया कि अब बीज गन्ना का व्यवसाय करने वाले सभी किसानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही बीज उत्पादन और बिक्री के लिए बीज अधिनियम 1966 का पालन करना जरूरी है। Sugarcane Cultivation
दूसरे प्रदेशों में प्रचलित किस्मों अथवा किसी अन्य देश से लाये गये सीड मैटेरियल को प्रदेश में उपयोग किये जाने के सम्बन्ध में क्वारंटाइन के नियम लागू होगें तथा बिना गन्ना आयुक्त की अनुमति के ऐसी किस्मों का बीज उत्पादन एवं व्यवसाय पर प्रतिबंधित होगा. उ.प्र. गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर में पंजीकृत बीज गन्ना उत्पादक कृषकों द्वारा गन्ने के रूप में बीज गन्ना / सीडलिंग का विक्रय गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा निर्धारित दरों पर किया जाएगा।
वहीं बीज गन्ना उत्पादक कृषकों द्वारा सम्बन्धित प्रक्षेत्र पर गन्ना बीज की किस्म, बुवाई की तिथि, बीज के स्रोत आदि का एक साईन बोर्ड (4×2 फिट) प्लाट पर स्थापित किया जायेगा, जिससे गन्ने बीज से सम्बन्धी विवरण आसानी से जानकारीहो सके. Sugarcane Cultivation
इस सम्बन्ध में विभाग द्वारा बताया गया कि अब तक बीज गन्ना उत्पादक के रूप में 2823 कृषक पंजीकृत थे जिनमें से कुल 593 बीज उत्पादकों का पंजीकरण वैध पाया गया है तथा 2230 फर्जी गन्ना बीज उत्पादकों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। Sugarcane Cultivation
प्रदेश में अवमुक्त गन्ने किस्मों के आनुवंशिक शुद्धता के अनुरक्षण रोग एवं कीटों के प्रभावी नियंत्रण तथा बीज गन्ना उत्पादन एवं विक्रय के नियमन सुनिश्चित करने के साथ साथ गन्ना कृषकों के व्यापक हितों में निर्गत दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा। Sugarcane Cultivation
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