गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए यूरिया व डीएपी ही नहीं 18 पोषक तत्व देना जरूरी, देखें कृषि वैज्ञानिकों की सलाह..

गेहूं एवं अन्य रबी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को कौन-कौन से पोषक तत्व देना चाहिए आइए (Crop Advisory) जानते हैं..

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Crop Advisory | मध्य प्रदेश सहित लगभग पूरे देश में रबी फसलों की बुवाई का कार्य चल रहा है। कई क्षेत्रों में गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है। खरीफ फसलों की उत्पादकता पर विपरीत असर के साथ-साथ रबी सीजन की फसलों में केवल खाद पर निर्भरता खेत की मिट्टी को कमजोर कर रही है।

किसान फसलों को प्रमुख रूप से यूरिया एवं डीएपी दे रहे हैं, जबकि खेत को 18 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। खेत में यह 18 पोषक तत्व डालने से उत्पादन में 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी आसानी से हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों से जानते हैं कि अच्छे उत्पादक के लिए खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व कब-कब एवं कितना डालना चाहिए..

खेत को चाहिए 18 पोषक तत्व | Crop Advisory

मध्य प्रदेश सहित देश के लगभग सभी राज्यों में परंपरागत खेती अधिक होती है। ज्यादातर किसान भाई खेतों में फसलों के पोषण के लिए सिर्फ यूरिया, डीएपी और पोटाश को ही तवज्जो देते हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से पौधों को अपने जीवन चक्र के लिए 18 जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। Crop Advisory

इनमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तो हवा और पानी से मिलते हैं, लेकिन शेष 15 तत्व मिट्टी या फोलियर स्प्रे ( पत्तियों पर छिड़काव ) के माध्यम से देना जरूरी है।

इन पोषक तत्वों में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे प्रमुख तत्व, कैल्शियम, सल्फर, मैग्नीशियम जैसे गौण तत्व और आयरन, जिंक, बोरॉन, कॉपर जैसे सूक्ष्म तत्व शामिल हैं। इनकी कमी से पौधे की वृद्धि रुक जाती है, पत्तियां पीली पड़ती हैं और उपज प्रभावित होती है। Crop Advisory

फसल की उत्पादकता 20-25% तक बढ़ेगी

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि फसलों के लिए समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन नीति अपनाकर किसान फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके लिए मिट्टी परीक्षण करवाना जरूरी होता हैं। Crop Advisory

मिट्टी परीक्षण के आधार पर समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना अब टिकाऊ खेती की सबसे जरूरी शर्त बन गया है। किसान ‘चार आर’ के सिद्धांतों का पालन फसल की उत्पादकता 20-25% तक बढ़ा देता है और उर्वरक की लागत घटाता है।

क्या है ‘चार आर’ सिद्धांत जानिए

कृषि वैज्ञानिकों ने अच्छे उत्पादन के लिए खेती में पोषक तत्वों की समुचित मात्रा को लेकर ‘चार आर’ का सिद्धांत दिया है। माना जाता है कि ‘चार आर सिद्धांत संतुलित पोषण की वैज्ञानिक कुंजी है। ‘चार आर’ के सिद्धांत ‘Four R’ Principle) के तहत प्रथम आर के रूप में सही स्रोत (Right Source) के अनुसार मिट्टी की स्थिति और फसल के अनुसार पोषक तत्व चुनें। Crop Advisory

द्वितीय आर के रूप में सही दर (Right Rate) के तहत जरूरत के अनुसार सटीक मात्रा में ही खाद दें। तृतीय आर के रूप में सही समय (Right Time) पर बुवाई, कल्ले बनते समय और फूल आने के चरण पर दें। वहीं अंतिम आर के रूप में सही स्थान (Right Place ) जड़ के पास या मिट्टी में गहराई पर उर्वरक दें ताकि हानि न हो।

घटेगी खेती में उर्वरक कीटनाशक की लागत

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जब किसान फसल को सभी 18 पोषक तत्व संतुलित मात्रा में देते हैं, तो उर्वरक की बर्बादी 20 से 30% तक घट जाती है। इससे उत्पादन में 15 से 25% तक स्थिर बढ़ोतरी होती है, जबकि मिट्टी का जैविक कार्बन भी 0.2 से 0.5% तक बढ़ जाता है। Crop Advisory

यह न केवल मिट्टी की सेहत सुधारता है, बल्कि नमी धारण क्षमता और जल उपयोग दक्षता भी बढ़ाता है। संतुलित पोषण देने से पौधे रोग और सूखे दोनों झेल पाते हैं, जिससे किसान को दीर्घकाल में कम लागत में ज्यादा उपज मिलती है।

यूरिया और डीएपी डालने से लगातार कम होती है उर्वरता

विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी की असली ताकत कार्बनिक पदार्थों में होती है, जो केवल देसी खादों से मिलती है। गोबर की खाद और कंपोस्ट जहां लंबे समय तक पोषक तत्व देते हैं, वहीं रासायनिक उर्वरक का असर तेज लेकिन अल्पकालिक होता है। Crop Advisory

बार-बार यूरिया और डीएपी डालने से मिट्टी का जैविक कार्बन घटता है, सूक्ष्म जीव मरते हैं और उर्वरता लगातार कम होती जाती है। इसके उलट, देसी खाद धीरे असर करती है लेकिन मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता और सूक्ष्मजीव जीवन को बनाए रखती है।

पोषक तत्वों की कमी के संकेत और असर

नाइट्रोजन की कमी: पुरानी पत्तियों में पीलापन, पौधे की धीमी वृद्धि, उपज में कमी।

फॉस्फोरस की कमी: पत्तियां गहरी या बैंगनी, जड़ें कमजोर। Crop Advisory

पोटैशियम की कमी: नई पत्तियों के किनारे सूखना या जलना, रोग प्रतिरोधकता घटती है।

कैल्शियम की कमी: नई कलियों में विकृति, फल का सिरा सड़ना।

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