गेहूं की फसल कटते ही 60 दिनों कि यह खेती मालामाल कर देगी, जानिए इसकी संपूर्ण जानकारी..

गर्मी के सीजन में कौन सी फसल फायदेमंद रहेगी एवं क्या है फसल की पूरी Moong cultivation in summer तकनीक जानें..

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1 गर्मी के सीजन में कौन सी फसल फायदेमंद रहेगी एवं क्या है फसल की पूरी Moong cultivation in summer तकनीक जानें..

Moong cultivation in summer | रबी का सीजन खत्म होने वाला है। सरसों, मसूर, रायड़ा के साथ गेहूं की फसल भी कटने लगी है। फसल कटने के बाद खेत पूरी तरह खाली हो जाएंगे। आमतौर पर रबी सीजन के पश्चात किसान खरीफ सीजन तक के लिए फुर्सत में हो जाते हैं। इस दौरान गर्मी में खेत की हकाई जुताई पर ध्यान दिया जाता है।

किंतु इसके पहले रबी फसलों के काटने के तुरंत बाद 60 दिन के अंतराल में किसानों को मूंग की फसल मालामाल कर देगी। कम अवधि में पकने के कारण बाद में खेत की हकाई जुताई के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाएगा। Moong cultivation in summer इस खेती की पूरी तकनीक एवं गर्मी में कैसे इससे अधिक से अधिक फायदा कैसे कमाए सब कुछ जानते हैं..

गर्मी में मूंग की खेती – Moong cultivation in summer

दलहनी फसलों में मूंग की बहुमुखी Moong cultivation in summer भूमिका है। इससे पौष्टिक तत्व प्रोटीन पर्याप्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मूंग में वसा की मात्रा कम होती है और इसमें विटमिन बी कम्पलेक्स, कैल्शियम, खाद्य रेशा एवं पोटेशियम भरपूर होता है।

गर्मी में मूंग की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फली तोड़ने के बाद फसलों को भूमि में पलट देने से यह हरी खाद की पूर्ति भी करता है। इतना ही नहीं सरकार मूंग को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदतीं है। किसान मूंग की उन्नत कृषि क्रियाएं अपनाकर उत्पादकता को बढ़ा सकता है।

गर्मी के लिए मूंग की उन्नत प्रजातियां

Moong cultivation in summer नरेन्द्र मूंग-1, मालवीय जागृति (एच.यू.एम. 12), समा्रट (पी.डी.एम. 139), मालवीय जनप्रिया (एच.यू.एम. 6), मेहा (आई.पी.एम. 99-125), पूसा विशाल, मालवीय जन कल्याणी (एच.यू.एम.-16), मालवीय ज्योति (एच.यू.एम. 1), टी.एम.वी. 37, मालवीय (एच.यू.एम. 12), आई.पी.एम. 2-3, आईपीएम 2-14, के.एम. 2241 (स्वेता), केएम-2195 (स्वाती), आई.पी.एम. 205-7 (विराट)।

गर्मी में मूंग की बुवाई का समय

गर्मी में मूंग की बुवाई Moong cultivation in summer रबी फसलों की कटाई के तुरंत बाद की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बसंत कालीन प्रजातियों की बुआई 15 फरवरी से 15 मार्च तथा ग्रीष्म कालीन प्रजातियों के लिए 10 मार्च से 10 अप्रैल का समय उपयुक्त होता है। जहाॅ बुआई अप्रैल के प्रथम सप्ताह के आसपास हो वहाॅ प्रजाति सम्राट एवं एच.यू.एम.-16 की बुआई की जाये।

मूंग की खेती के लिए भूमि एवं तैयारी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मूंग की खेती Moong cultivation in summer के लिए दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। पलेवा करके दो जुताइयाॅ करने से खेत तैयार हो जाता है। ट्रैक्टर, पावर टिलर, रोटावेटर या अन्य आधुनिक कृषि यंत्र से खेत की तैयारी शीघ्रता से की जा सकती है।

बीज दर व एवं बीज उपचार के बारे में जानें

Moong cultivation in summer कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक 15-18 किलो स्वस्थ्य बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। 2.5 ग्राम थीरम अथवा 2 ग्राम थीरम एवं 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 5 ग्राम ट्राडकोडर्मा $ स्यूडोमोनास से प्रति किलो बीज की दर से शोधन करें।

इससे प्रारम्भिक अवस्था में रोग रोधक क्षमता बढ़़ती है। इससे जमाव अच्छा हो जाता है। फलस्वरूप प्रति इकाई पौधों की संख्या सुनिश्चित हो जाती है और उपज में वृद्वि हो जाती है। इसके बाद मोनोक्रोटोफास 36 ईसी दवा 10 मिली/ किलो की दर से बीज का शोधित कर लें इससे तना बेधक मक्खी के प्रकोप से बचाव होता है तथा फसल की बढ़वार अच्छी होती है।

Moong cultivation in summer रसायन से बीज शोधन के बाद बीजों को एक बोरे पर फैलाकर, मूंग की विशिष्ट राईजोबियम कल्चर से उपचारित करते हैं। आधा लीटर पानी में 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर का पूरा पैकिट मिला दें। इस मिश्रण को 10 कि0ग्रा0 बीज के ऊपर छिड़ककर हल्के हाथ से मिलायें जिससे बीज के ऊपर एक हल्की पर्त बन जाती है।

इस बीज को छाये में 1-2 घन्टे सुखाकर बुवाई प्रातः 9 बजे तक या सायंकाल 4 बजे के बाद करें। तेज धूप में कल्चर के जीवाणुओं के मरने की आशंका रहती है। ऐसे खेतों में जहाॅ मूंग की खेती पहली बार अथवा काफी समय केे बाद की जा रही हो, वहाॅ कल्चर का प्रयोग अवश्य करें।

मूंग की खेती के लिए यह जरूरी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहनी फसलों Moong cultivation in summer के लिये फास्फेट पोषक तत्व अत्यधिक महत्वपूर्ण है। रसायनिक उर्वरकों से दिये जाने वाले फास्फेट पोषक तत्व का काफी भाग भूमि में अनुपलब्ध अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। फलस्वरूप फास्फेट की उपलबधता में कमी के कारण इन फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

भूमि में अनुपलब्ध फास्फेट को उपलब्ध दशा में परिवर्तित करने में पी.एस.बी. (फास्फेट सालूबलाईजिंग बैक्टिरिया) का कल्चर बहुत ही सहायक होता है। Moong cultivation in summer इसलिये आवश्यक है कि फास्फेट की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पीएसबी का भी प्रयोग किया जाये। पीएसबी प्रयोग विधि एवं मात्रा राइजोबियम कल्चर के समान ही रखना चाहिए।

मूंग की बुवाई की विधि

मूंग की बुवाई Moong cultivation in summer देशी हल के पीछे कूंडों में या सीडड्रिल से 4-5 सेमी की गहराई पर करें और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 सेमी रखनी चाहिए।

खाद एवं उर्वरक प्रबन्धन

खेतों में सामान्यतः Moong cultivation in summer उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के अनुसार किया जाना चाहिए। यदि मृदा परीक्षण नहीं हुआ है तो उस दशा में उर्वरक की मात्रा निम्नानुसार निर्धारित की जाये-

10-15 किलो नत्रजन, 40 किलो फास्फोरस एवं 20 किलो सल्फर प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें। फास्फोरस के प्रयोग से मूंग की उपज में विशेष वृद्वि होती है। उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय कूड़ों में बीज से 2-3 सेमी नीचे देना चाहिए।

मूंग की फसल में सिंचाई 

मूंग की सिंचाई भूमि की किस्मMoong cultivation in summer, तापमान तथा हवाओं की तीव्रता पर निर्भर करती है। आम तौर पर मूंग की फसल को 4-5 सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-35 दिन बाद और फिर बाद में 10-15 दिन के अन्तर से आवश्यकतानुसार सिंचाई की जाये।

पहली सिंचाई बहुत जल्दी करने से जड़ों तथा ग्रन्थियों के विकास पर विपरित प्रभाव पड़ता है। फूल आने से पहले तथा दाना पड़ते समय सिंचाई आवश्यक है। सिंचाई क्यारी बनाकर करना चाहिए। जहाॅ स्प्रिंकलर हो वहाॅ इसका प्रयोग उत्तम जल प्रबन्ध हेतु किया जाये। मिट्टी की जलधारण क्षमता कम होने तथा जलवायु (तापमान ज्यादा होने के कारण) के अनुसार किसान खेत में 6-8 सिंचाई तक करते हैं।

मूंग की खेती में खरपतवार प्रबन्धन

Moong cultivation in summer पहली सिंचाई के बाद निराई-गुडाई करने से खरपतवार नष्ट होने के साथ-साथ भूमि में वायु का भी संचार होता है जो उस समय मूल ग्रन्थियों में क्रियाशील जीवाणुओं द्वारा वायुमण्डलीय नत्रजन एकत्रित करने में सहायक होता है। खरपतवार नियंत्रण हेतु पंक्तियों में बोई गई फसल में वीडर का प्रयोग आर्थिक दृष्टि से लाभकारी होगा।

खरपतवारों का रासायनिक नियंत्रण पैन्डीमैथलीन 30 ई सी के 3.3 लीटर अथवा ऐलाक्लोर 50 ईसी के 3 लीटर को 600-700 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के दो-तीन दिन के अन्दर जमाव से पूर्व छिड़काव करें। क्वीजोलोफास इथाईल 5 प्रतिशत ईसी (टरगा सुपर) की 750-1000 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर का एक वर्षीय संकरी घास के लिए तथा 1250-1500 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा बहुवर्षीय (कांस एवं दूब) घास के लिए संस्तुत की गयी है।

इसका प्रयोग खरपतवार के 2-3 पत्तियों की अवस्था से लेकरbMoong cultivation in summer फूल वाली अवस्था पर प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग करने के 5 से 8 दिन के अन्दर पूर्णतः सूख जाती है। यह खरपतवारों जैसे सिटेरिया स्पी, डिजीटेरिया स्पी, साइनोडान स्पी, सैकरम स्पी, एल्यूसिन स्पी, सोरघम स्पी और हेमरथ्रीया स्पी को चौडी पत्ती वाले खरपतवारों को प्रभावी ढ़ंग से नियंत्रण करता है।

सोडियम एसीफ्लोरोफेन क्लोडिनाफाॅप उगे हुए घास जाति (सांवा, जंगली ज्वार, बनरा, पारा घास, सुनहरी घास, चिनियारी बट्टा, बरू, घोड़ा घास एवं मकड़ा) और चैडी पत्ती वाले खरपतवारों (बुचबुचा, चिरपोट, रेश्म काॅटा, आधा शीशी, छोटी दूधी, जंगली चैलाई, जंगली जूट, हूलहुल, कांजरू, हजार दाना, छोटा हलकुशा, पत्थरचट्टा, फुलकिया, गुलमेंहदी, गाजर घास, फाचरी, सफेद मूर्ग) को नियंत्रित कर सर्वोत्तम परिणाम देता है।

Moong cultivation in summer इस खरपतवारनाशी की 1 लीटर मात्रा को 375-500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 15-25 दिन के बीज खरपतवार की 2-4 पत्ती वाली अवस्था पर किया जाता हैं। यह चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को 3-4 दिनों में और घास जाति वाले खरपतवारों को 7 से 10 दिनों में नियंत्रित कर देता है।

हैलाक्सीफाॅफ-आर-मिथाइल (10.5 प्रतिशत ई.सी.) खरपतवारनाशी घास जाति वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु नवीनतम उत्पाद है। इसकी 1 लीटर मात्रा 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 15-20 दिनों के बीच प्रयोग किया जाता है। यह मुख्य रूप से पारा घास, चिनयारी, डाईनेब्रा, साॅवा, सुनहरी घास, एराग्रास्टिस स्पी, पैनिकम स्पी खरपतवारों को प्रभावी ढंग से नियंत्रण करता है।

मूंग की फसल में बीमारियां एवं रोकथाम

मूंग में प्रायः पीला चित्रवर्ण मौजेक रोग Moong cultivation in summer लगता है रोग के विषाणु सफेद मक्खी द्वारा फैलते है।

रोकथामः

  • Moong cultivation in summer इसकी रोकथाम के लिए समय से बुवाई करना अति आवश्यक है।
  • मोजेक अवरोधी प्रजातियों का प्रयोग करना चाहिए।
  • मोजेक वाले पौधे को सावधानी से उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • इस रोग के वाहक कीट (सफेद मक्खी) को सही समय पर उचित कीटनाशी से नियंत्रण करना चाहिए।

मूंग के कीट एवं रोकथाम

  • Moong cultivation in summer थ्रिप्स, हरे फुदके, कमल कीट एवं फली बेधक
  • मूंग की फसल में थ्रिप्स, हरे फुदके, कमल कीट एवं फली बेधक कीट लगते हैं।
  • इसके नियंत्रण के लिए क्यूनालफास 25 ईसी की 1.25 लीटर मात्रा 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए, जिससे की कीटों का प्रकोप न हो सके।
  • तना मक्खी, फलीबीटल, हरी इल्ली, सफेद मक्खी, माहों, जैसिड, थ्रिप्स
  • तना मक्खी, फलीबीटल, हरी इल्ली, सफेद मक्खी, माहों, जैसिड।

इनकी रोकथाम Moong cultivation in summer हेतु इण्डोसल्फान 35 ईसी 1 लीटर व क्वीनालफाॅस 25 ईसी 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या मिथाइल डिमेटान 25 ईसी की 0.5 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन बाद पुनः छिड़काव करें।

फलीछेदक एवं नीली तितली

Moong cultivation in summer पुष्पावस्था में फलीछेदक एवं नीली तितली का प्रकोप होता है। इसकी रोकथाम के लिए क्वलीनालफाॅस 25 ईसी का 1.5 लीटर या मिथाइल डिमेटान 25 ईसी का 0.5 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से इसकी रोकथाम हो सकती है।

कम्बल कीड़े

Moong cultivation in summer कई क्षेत्रों में कम्बल कीड़े का भारी प्रकोप होता है। इसकी रोकथाम के लिए पेराथियान चूर्ण 2 प्रतिशत, 25 किलो प्रति हे0़ के हिसाब से भुरकाव करेें।

फसल की कटाई

जब फसल Moong cultivation in summer में फलियां पक जाए तभी कटाई करनी चाहिए। कटाई करने के बाद भी खलिहान में अच्छी तरह सुखाकर मड़ाई करना चाहिए। इसके पश्चात ओसाई करके बीज और इसका भूसा अलग-अलग कर लेना चाहिए।

मूंग की उपज

Moong cultivation in summer किसान उन्नत कृषि तकनीकी का प्रयोग करके जायद में मूंग का उत्पादन लगभग 8-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते हैं। मूंग का भण्डारण से पहले अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। बीज में 8 से 10 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं रहनी चाहिए। 

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