शीतलहर एवं बदलते मौसम में फसलों का किस प्रकार से ध्यान (Crop Disease Control) रखना है आईए जानते हैं..
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Crop Disease Control | दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ ठंड का असर जनवरी में अब धीरे-धीरे तेज होने लगा है। ठंड का असर बढ़ने से तापमान में गिरावट के साथ ही खेतों में खड़ी फसलों पर कीट एवं रोगों का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इससे किसान चिंतित हैं।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर नियंत्रण नहीं किया गया तो फसलें प्रभावित होंगी। उत्पादन घटेगा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इन समस्याओं पर नियंत्रण हेतु कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए सलाह जारी की है आईए देखते हैं पूरी डिटेल..
रबी फसलों में कीट एवं रोग का प्रकोप
किसान बताते हैं कि इन दिनों चने की फसल में इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। सरसों, धनिया एवं मेथी की फसलों में माहू का असर बढ़ रहा है। इसके अलावा लहसुन की फसल में पीलापन आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों के अनुसार ठंड बढ़ने के साथ इन समस्याओं में तेजी आई है। Crop Disease Control
इससे फसलों की बढ़वार रुकने लगी है। स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े वैज्ञानिक फसलों का भौतिक सर्वे कर रहे हैं। वैज्ञानिक फसलों के निरीक्षण के के साथ-साथ किसानों से समस्याओं के विषय में भी जान रहे हैं।
किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों के सामने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि लगातार बढ़ रहे कीट व रोग फसलों को कमजोर कर रहे हैं। यदि समय पर समाधान नहीं मिला तो लागत भी नहीं निकल पाएगी। Crop Disease Control
वैज्ञानिकों की सलाह – लगातार निगरानी करें किसान
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को घबराने के बजाय नियमित निगरानी रखने, संतुलित पोषण देने और आवश्यकतानुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी। Crop Disease Control
वैज्ञानिकों ने कहा कि मौसम के अनुसार सावधानी बरतकर और समय पर उपचार करने से फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों से अपील की गई है कि किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें।
इन उपायों को कर फसलों को बचाएं
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि वर्तमान समय में किसान फसलों की सतत निगरानी करते रहे। इसके साथ ही किसान इस समय यह उपाय अपना कर अपने फसलों को शीतलहर के प्रकोप के साथ-साथ कीट एवं रोग प्रबंधन Crop Disease Control कर सकते हैं :–
चने की इल्ली का नियंत्रण : चने की इल्ली के नियंत्रण हेतु 12 हेलील्यूर फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं तथा 21 दिन के अंतराल पर ल्यूर बदलते रहें। खेत में 50 खूटियां अंग्रेजी के ‘T’ आकार में लगाएं। जैविक नियंत्रण के लिए एचएनपीवी (HNPV) 250 एलई या एजाडिरेक्टीन 1500 पीपीएम की 1.5 लीटर मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
रासायनिक नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत की 125 मिली या प्रोफेनोफॉस 50 प्रतिशत ईसी की 1000 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। Crop Disease Control
सरसों, धनिया एवं मेथी में माहू नियंत्रण : जैविक विधि से नियंत्रण के लिए वर्टिसिलियम लेकानी 1.0 प्रतिशत की 50 से 75 मिली मात्रा या एजाडिरेक्टीन 1500 पीपीएम की 60 से 75 मिली मात्रा या एजाडिरेक्टीन 10,000 पीपीएम की 30 से 45 मिली मात्रा या एनएसकेई 750 मिली प्रति पंप (15 लीटर) पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
रासायनिक नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 7 मिली या थायोमेथोक्जाम 25 डब्ल्यूजी की 5 ग्राम या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 30 मिली मात्रा प्रति पंप (15 लीटर) पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। Crop Disease Control
लहसुन में पीलापन रोकने के उपाय : लहसुन की फसल में पीलापन दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजॉल 25 प्रतिशत ईसी की 1 मिली मात्रा या पूर्व मिश्रित फफूंदनाशक कार्बेन्डाजिम एवं मैंकोजेब की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
पाले से बचाव के उपाय : फसलों में पाला पड़ने की आशंका होने पर घुलनशील सल्फर (85 प्रतिशत) की 3 ग्राम मात्रा या थायो यूरिया 0.5 ग्राम मात्रा या व्यापारिक गंधक (0.1 प्रतिशत) की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। Crop Disease Control
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