सरसों को सरसों की यह वैरायटी देगी किसानों को भरपूर फायदा.. 

आईए जानते हैं सरसों की सबसे लोकप्रिय किस्म आरएच 725 (Mustard RH 725 Variety) के बारे में..

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Mustard RH 725 Variety | रबी सीजन के दौरान उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों जैसे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश में सरसों की खेती प्रमुखता से की जाती है। बाजार में सरसों की कई वैरायटी चलन में है। इनमें से कुछ वैरायटी किसानों को अच्छा फायदा देती है।

इन वैरायटियों में से एक वैरायटी आरएच 725 है, जो किसानों को अच्छा फायदा देती है। आरएच 725 सरसों की किस्म Mustard RH 725 Variety एक लोकप्रिय और उच्च उपज देने वाली किस्म है, जिसे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) हिसार के डॉ. रामअवतार सिंह द्वारा विकसित किया गया है। इस वैरायटी के बारे में आइए जानते हैं..

Mustard RH 725 Variety की प्रमुख विशेषताएं

पकने की अवधि : 136 से 145 दिन

फलियां : लंबी और मोटी

दाने : मोटे और प्रति फली 17-20 दाने

तेल की मात्रा : 40% तक

बीज दर : प्रति एकड़ 1 किलोग्राम

उपज : प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक, कुछ क्षेत्रों में 15 क्विंटल तक

सिंचाई : आमतौर पर दो बार सिंचाई की आवश्यकता होती है

प्रकृति : यह एक रिसर्च वैरायटी है, जिसका अर्थ है कि किसान बीज को उपचारित करके दोबारा उपयोग कर सकते हैं।Mustard RH 725 Variety

आरएच 725 सरसों की किस्म के फायदे

  • सरसों की इस किस्म में बेहतर उच्च उपज देने की क्षमता है।
  • सरसों की इस किस्म का तना मजबूत होने के कारण पौधा भी मजबूत होता है और आसानी से गिरता नहीं है।
  • सरसों की आरएच 725 किस्म में तेल की अधिक मात्रा रहती है। अच्छी तेल की मात्रा होने से किसानों के लिए लाभदायक है।
  • प्रति एकड़ सिर्फ 1 किलो बीज की आवश्यकता होती है। इससे किसानों को फायदा मिलता है।
  • किसान इसी किस्म का बीज दोबारा लगा सकते हैं, जिससे बार-बार बीज खरीदने का खर्च बचता है।
  • यह किस्म बारानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।Mustard RH 725 Variety

सरसों की बिजाई का सही समय

सरसों ठंडी जलवायु की फसल है। यह उन फसलों में से है जो ठंडी रात और हल्की धूप में बेहतरीन तरीके से बढ़ती है। सरसों के बीज अंकुरण के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। वहीं, बढ़वार और फूल आने के समय तापमान 10 से 20 डिग्री के बीच होना चाहिए। अगर तापमान ज्यादा बढ़ जाए या ठंड बहुत अधिक हो जाए, तो सरसों की पैदावार पर असर पड़ सकता है।

बरसात के तुरंत बाद की नमी इस फसल के लिए बेहद फायदेमंद रहती है। यही वजह है कि सरसों की बिजाई अक्टूबर से नवंबर के बीच सबसे अच्छी मानी जाती है। इस समय मिट्टी में नमी रहती है और मौसम फसल के लिए अनुकूल रहता है।सरसों की बिजाई का सही समय ही पैदावार का सबसे बड़ा राज़ है। Mustard RH 725 Variety

सामान्यत: सरसों की बुवाई अक्टूबर से नवंबर तक की जाती है। उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों जैसे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश में इसे अक्टूबर के मध्य से नवंबर के पहले सप्ताह तक बोना सबसे उपयुक्त माना जाता है। अक्टूबर के मध्य से नवंबर का पहला सप्ताह सरसों की बुवाई के लिए सर्वोत्तम समय होता है। नवंबर के मध्य तक बिजाई करने से पैदावार ठीक-ठाक रहती है।

इसके अलावा दिसंबर में देर से बोई गई सरसों की उत्पादन घटने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि देर से बोने पर फसल को पर्याप्त ठंडी नहीं मिलती और फूल व दाना सही तरीके से नहीं बन पाते। वहीं, जल्दी बोने पर बीजों का अंकुरण अच्छा नहीं होता और फसल पर कीट और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि बिजाई हमेशा समय पर करें ताकि लागत कम और मुनाफा ज्यादा मिले। Mustard RH 725 Variety

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