1400 करोड़ रूपए की लागत से होगी किसानों की सबसे बड़ी परेशानी दूर, मिलेगा फायदा, पढ़िए डिटेल..

Irrigation Project : खेती में सबसे बड़ी सिंचाई की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एमपी सरकार ने किसानों के लिए 1400 करोड़ के सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू किया।

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Irrigation Project | किसानों के बीच खेती में सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की बनी रहती है। ऐसे में मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के किसानों को बड़ी सौगात दी है।

दरअसल, सीएम यादव ने हाल ही में 1402.74 करोड़ रुपये की लागत वाली सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 1088.24 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली निवाली माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया।

इस परियोजना का उद्देश्य जल स्रोतों से पानी उठाकर पाइपलाइनों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाना है। आधुनिक माइक्रो इरिगेशन (Irrigation Project) तकनीक का उपयोग करते हुए यह परियोजना किसानों को कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई का अवसर प्रदान कर रही है।

बता दें कि सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना 1402.74 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है, जिससे जिले के 98 गांवों में लगभग 44148.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

इस Irrigation Project परियोजना से लगभग 53 हजार किसान लाभान्वित होंगे। 2028-29 तक इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

‘खेत को पानी और हर हाथ को काम देना हमारा संकल्प’

Irrigation Project | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर खेत को पानी और हर हाथ को रोजगार दिलाना हमारा संकल्प है। पारस के स्पर्श से लोहा जिस प्रकार सोना हो जाता है, उसी प्रकार धरती को पानी मिले तो वह सोना उगलती है।

हम हर गांव तक और हर खेत तक पानी पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी है और निमाड़ के लोगों को मां नर्मदा का आंचल मिला है। नर्मदा घाटी की इंदिरा सागर परियोजना और लोअर गोई परियोजना की नहरों से बड़वानी जिले में सूक्ष्म सिंचाई पहले से हो रही है।

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सिंचाई परियोजना का उद्देश्य | Irrigation Project

सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल की कमी से जूझ रहे किसानों को राहत प्रदान करना है। इस परियोजना के तहत जल स्रोतों से पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

यह परियोजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। जिन किसानों के पास सीमित संसाधन हैं, वे भी अब अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी का उपयोग कर पा रहे हैं। : Irrigation Project

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कैसे काम करती है परियोजना?

जलाशयों और नदी स्रोतों से पानी को उठाने के लिए पंपिंग स्टेशन लगाए गए हैं।

माइक्रो इरिगेशन सिस्टम के तहत पाइपलाइन के माध्यम से पानी सीधे खेतों तक पहुंचाया जाता है।

इस प्रणाली से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो पाती है। : Irrigation Project

सेंधवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के लाभ

जल की बचत: पारंपरिक सिंचाई की तुलना में माइक्रो सिंचाई से 30-50% तक पानी की बचत होती है।

फसल उत्पादन में वृद्धि: फसलों को समय पर और पर्याप्त पानी मिलने से उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

कृषि लागत में कमी: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम के उपयोग से किसानों की सिंचाई लागत में कमी आई है। : Irrigation Project

पर्यावरण संरक्षण: जल संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है।

कैसे पाएं लाभ?

परियोजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या परियोजना कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद किसान इस योजना के अंतर्गत सिंचाई सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। : Irrigation Project

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