सरसों की खेती (Mustard Cultivation) में कीट प्रबंधन कैसे करें, आइए कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं..
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Mustard Cultivation | तिलहनी फसल के रूप में रबी सीजन के दौरान सरसों की खेती की जाती है। इस समय सरसों की फसल लगभग 1 महीने के आसपास की हो गई है। इस दौरान सरसों की फसल में कई प्रकार के कीट रोग फैलने की संभावना रहती है इससे उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है।
सरसों का सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट एक गंभीर रोग है जो सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यह रोग न केवल सरसों बल्कि अन्य फसलों जैसे मूली, शलजम, तारामीरा, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक और शकरकंद पर भी हमला कर सकता है। ऐसे में इन रोगों से फसल को कैसे बचाया जाए आइए कृषि वैज्ञानिकों (Mustard Cultivation) से जानते हैं..
सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट के लक्षण
सरसों की फसल में सबसे अधिक फैलने वाले सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट रोग के कारण सरसों की पत्तियों और तनों पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। यह रोग फसल को 23-55 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है।(Mustard Cultivation)
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सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट रोग का प्रबंधन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों का सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट एक गंभीर रोग है जो फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर बीज उपचार और फफूंदनाशी का छिड़काव करके हम इस रोग से बचाव कर सकते हैं और अपनी फसल की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट रोग से बचाव के लिए निम्नलिखित तरीकों का पालन करें :–
बीज उपचार : बीजों को मेटालेक्जिल (एप्रोन 35 एसडी) 6 ग्राम/किग्रा बीज या मैन्कोजेब 2.5 ग्राम/किग्रा बीज से उपचारित कर बोयें।(Mustard Cultivation)
फफूंदनाशी का छिड़काव : खड़ी फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) या रिडोमिल एमजेड 72 फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अंतराल पर करें।
सरसों की जड़ों का छुपा दुश्मन है मरगोझा
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मरगोझा एक परजीवी पौधा है जो सरसों की जड़ों में लगकर फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है। यह एक गंभीर समस्या है जिसका समाधान समय पर करना आवश्यक है। इस लेख में, हम मरगोझा से बचाव के लिए कुछ प्रभावी तरीकों पर चर्चा करेंगे।(Mustard Cultivation)
मरगोझा से बचाव के तरीके
पहला छिड़काव : फसल की बुवाई के 25-30 दिन बाद राउंडअप या ग्लाइसल 25ml प्रति एकड़, 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।(Mustard Cultivation)
दूसरा छिड़काव : 50-55 दिन बाद 50ml प्रति एकड़ के हिसाब से करें।
छिड़काव की विधि: कट या टक नोजल से एक साथ छिड़काव करें और सिंचाई 3-4 दिन बाद करें।
सही समय पर दवा लगाना : सही समय पर दवा लगाने से पौधे की जड़ तक असर पहुंचता है और मरगोझा पर पूरा नियंत्रण मिलता है।(Mustard Cultivation)
सरसों की अच्छी फुटान के लिए यह करें
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय सरसों की फसल में फुटान हो रहा है। सरसों की फसल के अच्छी फुटान के लिए फसल में पहला पानी देते समय 200 ग्राम कार्बेंडाजीम 50% WP पाउडर 1 बिघा (0.25 हैक्टेयर) में देने से फफूंदजनित बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि दूसरा पानी देते हैं, तो यह दवाई पहले पानी के समय काम नहीं लेनी चाहिए, बल्कि दूसरे पानी के समय ही काम लेनी चाहिए।
इससे फफूंदजनित बीमारियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि बुवाई के समय सिंगल सुपर फॉस्फेट काम में नहीं लिया है, तो जिप्सम 5 किलो प्रति बिघा (0.25 हैक्टेयर) में डालने से तेल की मात्रा और दाने की चमक अच्छी मिल सकती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिंक 33% को 5 किलो प्रति बिघा डालने से फुटान अच्छी होती है।(Mustard Cultivation)
किसान साथी इन बातों का ध्यान रखें
कटाई के समय नजदीक आने पर दवा का असर कम हो जाता है, इसलिए समय पर दवा लगाना आवश्यक है।
मरगोझा से बचाव के लिए नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई करना आवश्यक है।
मरगोझा एक गंभीर समस्या है जो सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। समय पर दवा लगाने और नियमित निगरानी से हम मरगोझा पर नियंत्रण पा सकते हैं और अपनी फसल की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।(Mustard Cultivation)
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