3 से 4 सिंचाई में बेहतरीन उत्पादन देगी गेहूं की 3 नवीन किस्में, खाने के लिए भी उपयुक्त, पूरी जानकारी..

गेंहू की यह तीन किस्में 3 new varieties of wheat कम पानी में भी अच्छी पैदावार देगी खाने के लिए भी उपयुक्त है। पढ़िए इनकी पूरी जानकारी…

3 new varieties of wheat | मानसून की बेरुखी से इस वर्ष किसान खासे परेशान हुए। खरीफ की अन्य फसलों के साथ सोयाबीन की फसल लगभग 50 से 60% नष्ट हो गई है। किसानों को अब रबी सीजन से कुछ आशा है हालांकि इस वर्ष अभी से यह आसार बन चुके हैं कि रबी सीजन में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा।

ऐसी दशा में कम पानी में होने वाली गेहूं की वैरायटियां किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है। चौपाल समाचार के इस लेख में जानते हैं कि कम पानी के दौरान कम सिंचाई में अच्छा उत्पादन देने वाली गेहूं की नवीन वैरायटियां 3 new varieties of wheat कौन-कौन सी है एवं उनके इनकी प्रमुख विशेषताएं एवं पैदावार क्या है..

गेंहू की 3 नई वैरायटी 3 new varieties of wheat

  1. गेंहू – एच.आई. 1634 (पूसा अहिल्या)
  2. गेंहू – एच.आई. 1650 (पूसा ओजस्वी)
  3. गेंहू – एच.आई. 1636 (पूसा बकुला)

आइए अब इनकी जानकारी विस्तारपूर्वक जानें..

1. गेहूँ – एच.आई. 1634 (पूसा अहिल्या)

गेहूँ की यह किस्म गेहूँ अनुसंधान केन्द्र, इंदौर (IARI) से वर्ष 2021 में जारी की गई है। इसका गजट नोटिफिकेशन क्र. एस.ओ. 500 (E) दिनांक 29.1.2021 है। गेहूँ की पूसा अहिल्या किस्म चपाती एवं बिस्कीट हेतु एक सर्वश्रेष्ठ आदर्श किस्म के रूप में म.प्र., राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, झाँसी क्षेत्र देश के मध्यक्षेत्र में बोनी हेतु अनुंशसित की गई है।

इस किस्म ने अपनी चेक किस्मों 3 new varieties of wheat के विरूद्ध 17 से 30 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन दिया है। इस किस्म में अधिक तापमान की स्थितियों में भी अपनी उम्र उत्पादन क्षमता के गुण के कारण लगभग 30 क्विंटल एकड़ या 70.60 क्विंटल हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता है।

गेहूँ – एच.आई. 1634 (पूसा अहिल्या) की खासियत :-

इस किस्म 3 new varieties of wheat की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उच्च तापमान होने पर भी यह किस्म जल्दी नहीं पकती है, जिससे इसका उत्पादन कम नहीं होता है। फरवरी / मार्च में तापमान बढ़ने पर अन्य पुरानी किस्मों में जो 20 प्रतिशत तक की क्षति उत्पादन में होती है वह इस किस्म की बढ़े तापमान को सहन करने की क्षमता के कारण इसमें नहीं होती है।

पूसा अहिल्या एक अर्ली किस्म अवधि 105 से 110 दिवस होने से इस किस्म को देरी बोनी हेतु दिसम्बर के अंत तक बोने के लिये भी एक सर्वश्रेष्ठ किस्म के रूप में अनुशंसित किया गया है। जिसके कारण आलू-मटर व अन्य अगाती फसल लेने वाले किसानों के लिये यह किस्म वरदान सिद्ध होगी।

इसके अतिरिक्त पूसा अहिल्या किस्म 3 new varieties of wheat एक अल किस्म होने से अवधि 105 से 110 दिवस व तापमान की सहनशीलता के गुण के कारण दो सिचाई में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता जिससे बिजली पानी की बचत तीन से चार सिचाई देने पर उत्पादन में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी।

इस किस्म की ऊँचाई कम 80 से 85 से.मी. होने व कुचे (टिलरिंग) काफी होने से आड़ा पड़ने की (लॉजिंग) की समस्या नहीं। तकनीकी एनेलेसिस एवं लेब से प्राप्त आकड़ों के अनुसार पूसा अहिल्या किस्म चपाती एवं बिस्कीट हेतु देश की सर्वश्रेष्ठ किस्म बन सकती है।

इसके 1000 दानों का वजन लगभग 40 ग्राम से 5/- इस किस्म में कर्नाल बंट, लुज स्मट, स्टेम रस्ट, लीफ ब्लाईट, फ्यूजेरियम हेड ब्लाईट, रूट राट, फ्लेग स्मट आदि बीमारियों के प्रति प्रतिरोधकता होने से सुरक्षित उत्पादन की गारंटी।

इस किस्म की बीज दर प्रति एकड 40/45 किलो प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलो व लाईन से लाईन की दूरी 9″ से 10″ इंच रखने आदर्श कार्यमाला अनुसार अनुशंसित फर्टीलाईजर एवं सिंचाई प्रबंधन करने पर आदर्श परिणाम। गेहूँ 3 new varieties of wheat की पूसा अहिल्या किस्म अपनी उच्च उत्पादकता एवं अपनी सर्वगुण सम्पन्नता वाले उपरोक्त वर्णित गुणों के कारण अतिशीघ्र परम्परागत पुरानी किस्मों को पीछे छोड़कर एक अग्रणी किस्म के रूप में कृषि क्षेत्र एवं किसानों में लोकप्रियता के नए आयाम बनाकर अपना एक नाम व उच्च स्थान बनाने में सफल होगी।

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2. गेंहू – एच.आई. 1650 (पूसा ओजस्वी)

3 new varieties of wheat : कृषि वैज्ञानिकों ने अथक परिश्रम एवं लंबे शोध के बाद गेहूं की नई वैरायटी विकसित की है। लंबे शोध के बाद इस किस्म को मध्य भारत क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। क्योंकि यह वैरायटी पूसा ओजस्वी पौष्टिक प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए भी उपयोगी होगी, जो जल्द ही गेहूं उत्पादक राज्यों के खेतों में लहलहाती दिखेगी।

यह वैरायटी HI 1650 – पूसा ओजस्वी के नाम से जानी जाएगी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित की गई गेहूं की इस वैरायटी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान के कोटा, उदयपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी संभाग के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित 3 new varieties of wheat की गई है।

गेंहू – एच.आई. 1650 (पूसा ओजस्वी) की खासियत :-

गेहूं की इस किस्म की हाइट मीडियम रहेगी। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक तेजस गेहूं 3 new varieties of wheat की हाइट के समान ही इस गेहूं की हाइट है। हाइट मीडियम सामान्य होने के कारण बारिश एवं हवा के दौरान गिरने की समस्या नहीं रहेगी। मोटे तने और कम लंबाई के कारण फसलें जमीन पर नहीं लेटेंगी और खूब पैदावार होगी। इसके अलावा इसकी प्रमुख खासियत विशेषता यह है ही इसकी बाली में 70 से 80 दाने रहते हैं एक रो में चार दाने रहेंगे।

पूसा ओजस्वी का विज्ञानी नाम एचआइ 1650 है।अधिक सिंचाई वाले क्षेत्र में नवंबर माह में बोई जाएगी। औसत उत्पादन 60 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहेगा। एक हेक्टेयर में 100 किग्रा बीज की बुआई होगी। गेहूं 3 new varieties of wheat की यह वैरायटी पौष्टिकता के साथ-साथ खाने के लिए उपयुक्त रहेगी। 90 से 95 सेमी पौधे की ऊंचाई होगी और 115 से 120 दिन में फसल पक जाएगी। 1000 दानों का वजन 45 से 50 ग्राम रहेगा। लंबे आकार का दाना चमकीला और कठोर रहेगा।

कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं गेहूं की इस किस्म की क्वालिटी और पोषण तत्वों की जांच करनाल स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में पूरी हो चुकी है। आने वाले सीजन में किसानो को इसका बीज उपलब्ध हो सकेगा।

 3. गेहूँ-एच.आई. 1636 (पूसा बकुला) 

3 new varieties of wheat : क्षेत्रीय गेहूँ अनुसंधान केन्द्र (IARI) इंदौर से हाल ही में जारी गेहूँ की यह किस्म पूसा बकुला को समय पर बोनी के लिये देश के मध्य क्षेत्र म.प्र., गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं बुंदेलखंण्ड क्षेत्र के लिये अनुशंसित किया गया है।

इस किस्म का गजट नोटिफिकेशन क्र. एस.ओ.8 (E) दिनांक 24-12-2021 है। यह किस्म चपाती एवं बिस्कीट हेतु एक सर्वश्रेष्ठ किस्म के रूप में अपने मोटे एवं बोल्ड, आकर्षक दाने तथा अपनी उच्च उत्पादन क्षमता के गुण के कारण अतिशीघ्र किसानों में लोकप्रिय किस्म के रूप में अपना स्थान बना लेगी।

गेहूँ-एच.आई. 1636 (पूसा बकुला) की खासियत :- 

इस किस्म की ऊँचाई लगभग 100 से.मी. एवं 1000 दानों का वजन 55 ग्राम व अधिकतम उत्पादन क्षमता 78.80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर 3 new varieties of wheat व व्यवहारिक परिस्थितियों में इस किस्म का बम्पर उत्पादन किसानों द्वारा 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से भी अधिक लिया गया है। इस किस्म की अवधि लगभग 122 दिवस है।

गेहूँ की बकुला किस्म चपाती एवं बिस्कीट के लिये श्रेष्ठ मानी गई है। इसमें चपाती हेतु (8.24) बिस्कीट हेतु (6.50) स्कोर इसका ग्लू स्कोर (6/10) टेस्ट वेट (80.6 कि.ग्रा. / HL) हाई सेडिमेटेशन वल्यू (42.6 एम.एल.) है जो कि उच्च स्तर पर मानी जाती है।

गेहूँ की इस किस्म में कीटों का विशेष प्रभाव नहीं देखा गया है। कर्नाल बंट / फ्लेग स्मट, स्टेम एवं लीफ रस्ट आदि वायरस एवं अन्य रोगों के प्रति प्रतिरोधकता का गुण भी इस किस्म में देखा गया है, जो काफी हद तक सुरक्षित उत्पादन की गारंटी देता है।

गेहूँ की इस किस्म 3 new varieties of wheat की बीज दर 55 किलो प्रति एकड़ या 135 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर रखने पर कतार से कतार की दूरी 9″ से 10″ इंच रखने नवंबर से 15 दिसम्बर तक 4 से 5 सिंचाई देने आदर्श कार्यमाला का पालन करने पर आदर्श परिणाम।

गेहूँ की पूसा बकुला (एच.आई. 1636) किस्म उच्चतम उत्पादन क्षमता, मोटा, बड़ा दाना, रोटी खाने में अत्यंत स्वादिष्ट भरपूर पोषक तत्व, कीट एवं बीमारियों के प्रति प्रतिरोधकता एडवांस जनरेशन की बॉयो फोर्टीफाईड किस्म, उच्च तापमान पर भी अधिकतम उत्पादन देने की अनुठी क्षमता, ऐसे अनेक गुणों के कारण इस किस्म 3 new varieties of wheat को आल इन वन किस्म की संज्ञा भी दी जा सकती है। जो कि बहुत जल्दी किसानों के दिलों एवं खेतों पर आच्छादित हो जावेगी।

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3 thoughts on “3 से 4 सिंचाई में बेहतरीन उत्पादन देगी गेहूं की 3 नवीन किस्में, खाने के लिए भी उपयुक्त, पूरी जानकारी..”

  1. गेहूँ की तीनों बैराठी बहुत शानदार हे इस बार में किसी दो बैराठी मेरे खेत पर लगना है मैंने पिछले साल भी इन बैराठी के बारें पढ चुका था परन्तु बाज़ार मे उपलब्ध नहीं थी किसी दो बैराठी बोना है तो सिंगल बोना है या डबल हमारे यहाँ जमीन हल्की पथरीली भूरी है और पानी की भी कमी है आप सही जानकारी शेयर करें बहुत बहुत धन्यवाद डाॅ मिलन मेसरा

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